नई दिल्ली, 24 जुलाई। दुनिया के प्रमुख उद्योगपति एलन मस्क ने अपने ऊपर लगाए जा रहे नस्लवाद के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनकी सोच और कार्यशैली को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। एक हालिया साक्षात्कार में मस्क ने अपनी निजी जिंदगी और पेशेवर कार्यसंस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कंपनियों में विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समुदायों के लोग साथ मिलकर काम करते हैं।
पार्टनर और परिवार का दिया उदाहरण
एलन मस्क ने अपनी पार्टनर और न्यूरालिंक की वरिष्ठ कार्यकारी शिवोन जिलिस का उल्लेख करते हुए बताया कि वह आधी भारतीय मूल की हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार की विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि इस बात का प्रमाण है कि नस्ल या जातीय पहचान के आधार पर भेदभाव की सोच से उनका कोई संबंध नहीं है।
मस्क ने यह भी बताया कि उनके चार बच्चों में से एक बेटे का नाम ‘शेखर’ रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह नाम भारतीय-अमेरिकी नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर के सम्मान में रखा गया है, जिनका विज्ञान के क्षेत्र में योगदान पूरी दुनिया में सराहा जाता है।
नस्लवाद के आरोपों को किया खारिज
मस्क ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे नस्लवाद के आरोप निराधार हैं। उनका कहना था कि उनकी कंपनियों में नियुक्तियां केवल प्रतिभा, क्षमता और योग्यता के आधार पर की जाती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विभिन्न पृष्ठभूमियों से आने वाले कर्मचारी उनकी संस्थाओं की सफलता का महत्वपूर्ण आधार हैं।
अप्रवासन और सांस्कृतिक मूल्यों पर रखी राय
साक्षात्कार के दौरान एलन मस्क ने अप्रवासन और अपराध जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी चिंता किसी विशेष नस्ल, धर्म या समुदाय को लेकर नहीं है, बल्कि पश्चिमी देशों की सांस्कृतिक परंपराओं, कानूनों और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश में आने वाले लोगों को वहां के कानूनों और सामाजिक व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। मस्क के अनुसार, सामाजिक संतुलन और कानून के प्रति सम्मान किसी भी लोकतांत्रिक समाज की स्थिरता के लिए आवश्यक है।
बयान बना चर्चा का विषय
एलन मस्क का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब उनके विचारों और सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर लगातार बहस होती रही है। उनके इस स्पष्टीकरण के बाद नस्लवाद और अप्रवासन से जुड़े मुद्दों पर नई चर्चा शुरू हो गई है।


