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अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर पंचकूला में राष्ट्रीय कार्यशाला, गिद्ध संरक्षण पर जोर

पंचकूला, 06 सितंबर। अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 के अवसर पर रविवार को हरियाणा के पंचकूला में गिद्ध संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ‘संकट से सुधार की ओर- भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन किया।

कार्यक्रम में हरियाणा के पर्यावरण, वन और वन्यजीव राज्य मंत्री राव नरबीर सिंह के साथ केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला में वरिष्ठ वन अधिकारी, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक, चिड़ियाघर विशेषज्ञ और गिद्ध संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

गिद्ध प्रकृति के सबसे कुशल सफाईकर्मी

सभा को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का पर्यावरण संरक्षण का दृष्टिकोण किसी एक प्रजाति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बिग कैट, स्लॉथ बियर, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, डॉल्फिन, घड़ियाल, जंगली भैंस और गिद्धों के संरक्षण से जुड़ी पहल इसी व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में सफेद पीठ वाले, लंबी चोंच वाले, पतली चोंच वाले, लाल सिर वाले, मिस्री, हिमालयन ग्रिफॉन, यूरेशियन ग्रिफॉन, सिनेरियस और दाढ़ी वाले गिद्ध समेत कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनके संरक्षण के लिए देश में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गिद्ध प्रकृति के सबसे कुशल सफाईकर्मी हैं। ये मृत जानवरों के शवों को तेजी से खाकर पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

1990 के दशक से गिद्धों की संख्या में गिरावट

भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत में 1990 के दशक से गिद्धों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। इसके प्रमुख कारणों में उनकी खाद्य श्रृंखला में बाधा और पशुओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दर्द निवारक दवाएं शामिल थीं। इन दवाओं के कारण ऐसे पशुओं के शव खाने वाले गिद्धों की बड़ी संख्या में मौत हुई।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया जलवायु परिवर्तन और मानव-पशु संघर्ष जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में गिद्ध संरक्षण के लिए ‘पूरी सरकार’ और ‘पूरा समाज’ के दृष्टिकोण से सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

केंद्रीय मंत्री ने गिद्ध-सुरक्षित पशु चिकित्सा, सुरक्षित भोजन की उपलब्धता और तकनीकी क्षमता बढ़ाने के माध्यम से गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने पशु चिकित्सकों, पशुपालकों और स्थानीय लोगों से सुरक्षित शव प्रबंधन को बढ़ावा देने की अपील की।

पिंजौर के जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र का दौरा

कार्यशाला से पहले केंद्रीय मंत्री ने पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र का दौरा किया। उन्होंने केंद्र की सुविधाओं का निरीक्षण किया और अधिकारियों से बातचीत की। यह केंद्र हरियाणा वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की संयुक्त पहल है। यहां सफेद पीठ वाले, लंबी चोंच वाले और पतली चोंच वाले गिद्धों के प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।

बताया गया कि वर्ष 2025-26 में केंद्र में 356 गिद्ध थे और 35 चूजों का प्रजनन हुआ। इस अवधि में 87 गिद्धों को जंगल में छोड़ा गया, जबकि 90 पक्षियों को अन्य संस्थानों में भेजा गया। इसके अलावा 22 संस्थानों के 1,222 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया।

हरियाणा के मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि संरक्षण की सफलता का आकलन केवल पैदा हुए जानवरों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए स्वस्थ आबादी, वैज्ञानिक ज्ञान और जंगल में प्रजाति की वापसी को भी महत्वपूर्ण मानदंड बनाया जाना चाहिए।

कॉफी टेबल बुक का विमोचन

कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, हरियाणा वन एवं वन्यजीव विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र, पिंजौर के सहयोग से किया गया।

इस अवसर पर ‘स्टोरी ऑफ जटायु : सेविंग इंडियाज वल्चर’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। साथ ही गिद्ध संरक्षण विषय पर आयोजित ड्राइंग और फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।

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