लेख-विचार

यूपीआई पर एमडीआर शुल्क की तैयारी: क्या अमरीकी दबाव में बदला जा रहा है मुफ्त भुगतान का नियम?

नई दिल्ली, 25 अगस्त: लोकसभा ने 6 अगस्त 2026 को भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से संबंधित विधेयक पारित किया। इसके...

कम उम्र में विवाह का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

डॉ. मनोज कुमार तिवारी भारतीय समाज में विवाह को केवल दो व्यक्तियों के बीच संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया नहीं माना जाता, बल्कि इसे एक...

20 अगस्त : विश्व मच्छर दिवस — मच्छर जानलेवा है, जागरूकता और स्वच्छता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार

— कांतिलाल मांडोत मच्छर आकार में भले ही बहुत छोटा जीव है, लेकिन मानव स्वास्थ्य के लिए इसका खतरा बेहद बड़ा है। दुनिया में अनेक...

जब कैमरा बोलता है: फोटोग्राफी, पत्रकारिता और इतिहास का अमिट संबंध

— सुरेश सिंह बैस "शाश्वत" "एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है।" यह कथन केवल एक लोकप्रिय कहावत नहीं, बल्कि संचार और इतिहास का...

दहेज में सात पौधे मांगकर भोज साहू ने रची हरियाली की ऐसी मिसाल, जो 12 राज्यों तक पहुंची

कांतिलाल मांडोत दहेज हमारे समाज की उन कुरीतियों में शामिल है, जिसने न जाने कितने परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाला है। विवाह...

भारतीय चिकित्सा व्यवस्था: आयुर्वेद से आधुनिक विज्ञान तक स्वस्थ भारत की सशक्त यात्रा

— सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ “सर्वे सन्तु निरामयाः”—यह केवल एक वैदिक प्रार्थना नहीं, बल्कि भारतीय चिकित्सा दर्शन का मूल मंत्र है। भारत की चिकित्सा परंपरा...

गांव की लड़कियां यूनिवर्सिटी तक क्यों नहीं पहुंच पातीं? शिक्षा के बाद भी जारी है अवसरों की दूरी

धनवती | लूणकरणसर, राजस्थान राजस्थान के गांव की लड़कियां की शिक्षा की तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में बदली है, लेकिन यह बदलाव अभी उस मुकाम...

घेवर की मिठास पर मिलावट का साया, त्योहारों में खाद्य सुरक्षा की बढ़ी चिंता

डॉ. सत्यवान सौरभ सड़कों और मोहल्लों में बिना उत्पादन तिथि या गुणवत्ता जांच के बेची जाने वाली मिठाइयां गंभीर चिंता का विषय हैं। मानसून के आगमन...

घर की रखवाली से परिवार के सदस्य तक… ‘फर बेबी’ बने पालतू पशु, बदल रही इंसानियत की तस्वीर

कांतिलाल मांडोत कभी घर की रखवाली के लिए पाला जाने वाला कुत्ता और चूहे पकड़ने के लिए घर में रखी जाने वाली बिल्ली आज इंसानी...

क्या अब निजी कार खरीदना समझदारी है? किराये की गाड़ी और साझा परिवहन के बहुआयामी लाभ

डॉ. शैलेश शुक्ला स्वामित्व नहीं, उपयोग की संस्कृति ही टिकाऊ भविष्य का मार्ग बीसवीं सदी ने दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि निजी कार आधुनिकता, समृद्धि...