लेख-विचार

भारतीय चिकित्सा व्यवस्था: आयुर्वेद से आधुनिक विज्ञान तक स्वस्थ भारत की सशक्त यात्रा

— सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ “सर्वे सन्तु निरामयाः”—यह केवल एक वैदिक प्रार्थना नहीं, बल्कि भारतीय चिकित्सा दर्शन का मूल मंत्र है। भारत की चिकित्सा परंपरा...

गांव की लड़कियां यूनिवर्सिटी तक क्यों नहीं पहुंच पातीं? शिक्षा के बाद भी जारी है अवसरों की दूरी

धनवती | लूणकरणसर, राजस्थान राजस्थान के गांव की लड़कियां की शिक्षा की तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में बदली है, लेकिन यह बदलाव अभी उस मुकाम...

घेवर की मिठास पर मिलावट का साया, त्योहारों में खाद्य सुरक्षा की बढ़ी चिंता

डॉ. सत्यवान सौरभ सड़कों और मोहल्लों में बिना उत्पादन तिथि या गुणवत्ता जांच के बेची जाने वाली मिठाइयां गंभीर चिंता का विषय हैं। मानसून के आगमन...

घर की रखवाली से परिवार के सदस्य तक… ‘फर बेबी’ बने पालतू पशु, बदल रही इंसानियत की तस्वीर

कांतिलाल मांडोत कभी घर की रखवाली के लिए पाला जाने वाला कुत्ता और चूहे पकड़ने के लिए घर में रखी जाने वाली बिल्ली आज इंसानी...

क्या अब निजी कार खरीदना समझदारी है? किराये की गाड़ी और साझा परिवहन के बहुआयामी लाभ

डॉ. शैलेश शुक्ला स्वामित्व नहीं, उपयोग की संस्कृति ही टिकाऊ भविष्य का मार्ग बीसवीं सदी ने दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि निजी कार आधुनिकता, समृद्धि...

मानसून का कहर बना राष्ट्रीय चुनौती: गंगा उफान पर, गुजरात से असम तक जनजीवन प्रभावित

कांतिलाल मांडोत देश में मानसून एक बार फिर अपने रौद्र रूप में दिखाई दे रहा है। उत्तर भारत से लेकर पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर भारत...

एआई की बढ़ती स्वायत्तता: तकनीकी प्रगति के साथ सुरक्षा और नैतिकता की नई चुनौती

तकनीक का विकास मानव जीवन को सरल, सुरक्षित और अधिक सक्षम बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। लेकिन जब यही तकनीक अपने निर्धारित...

भविष्य की आहट: विदेशी शक्तियों और भितरघातियों की जुगलबंदी विफल

डॉ. रवीन्द्र अरजरिया लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिक अधिकारों का मूल आधार होते हैं, परंतु जब असहमति की आड़ में विदेशी धन, अत्याधुनिक...

नीट से डॉक्टर बनने तक: क्या हमारी मेडिकल शिक्षा संवेदनशील चिकित्सक तैयार कर रही है?

डॉ. सत्यवान सौरभ देश में जब भी नीट (NEET) परीक्षा होती है, चर्चा केवल परिणामों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने...

जंतर-मंतर से संसद तक मार्च: शिक्षा सुधार का आंदोलन या राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन?

कांतिलाल मांडोत दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाले गए तथाकथित "चलो संसद" ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि...