गुवाहाटी, 05 सितंबर। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को कहा कि अहोम राजवंश की ऐतिहासिक राजधानी रंगपुर-शिवसागर को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत की ओर से रंगपुर-शिवसागर एन्सेम्बल को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए औपचारिक नामांकन प्रस्तुत किया गया है।
यूनेस्को में 19 जून को प्रस्तुत हुआ नामांकन
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि 19 जून, 2026 को पेरिस स्थित यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने रंगपुर-शिवसागर एन्सेम्बल को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा देने के लिए औपचारिक रूप से नामांकन प्रस्तुत किया। यह नामांकन यूनेस्को के मानदंड (iii) और (iv) के तहत किया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह पहल अहोम विरासत और सभ्यता के गौरवशाली इतिहास को वैश्विक मंच पर अधिक प्रमुखता से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
छह शताब्दियों के अहोम शासन की विरासत
अहोम राजवंश ने ब्रह्मपुत्र घाटी पर करीब छह शताब्दियों तक लगातार शासन किया था। रंगपुर-शिवसागर परिसर में अहोम काल की उत्कृष्ट स्थापत्य और इंजीनियरिंग विरासत आज भी मौजूद है।
इस परिसर में रंगघर, कारेंगघर, ऐतिहासिक मंदिर, तालाब और कई अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि रंगघर एशिया के सबसे पुराने जीवित एम्फीथिएटरों में से एक है।
चराइदेव के बाद अहोम विरासत को वैश्विक पहचान की पहल
डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि वर्ष 2024 में चराइदेव के मैदाम को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद रंगपुर-शिवसागर का नामांकन अहोम विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि चराइदेव अहोम राजवंश की स्मृतियों को संजोए हुए है, जबकि शिवसागर उनके शासन की गौरवगाथा को दर्शाता है। दोनों स्थल मिलकर असम के अहोम इतिहास की समृद्ध कहानी को पूर्ण करते हैं।
मुख्यमंत्री ने असम की विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति राज्य की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।



