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शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से 19 शिक्षक सम्मानित, राज्यपाल ने कहा- शिक्षक राष्ट्र के भविष्य के निर्माता

देहरादून, 05 सितंबर। शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को लोक भवन में आयोजित शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार समारोह में वर्ष 2025 के लिए चयनित 19 शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने सभी सम्मानित शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किए और उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

शिक्षक पीढ़ियों को दिशा देने वाले मार्गदर्शक: राज्यपाल

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल एक पेशे से जुड़ा व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह पीढ़ियों को दिशा देने और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने वाला मार्गदर्शक होता है। शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ-साथ उनमें संस्कार विकसित करता है, उनकी प्रतिभा को पहचानता है और उन्हें जीवन की सही दिशा दिखाता है।

उन्होंने कहा कि हजारों शिक्षकों के बीच चयनित होकर शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार प्राप्त करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण और उनके उत्कृष्ट कार्य की पहचान है।

राज्यपाल ने कहा कि किसी शिक्षक की सफलता केवल इस आधार पर तय नहीं की जा सकती कि उसकी कक्षा के कितने विद्यार्थियों ने अच्छे अंक हासिल किए। शिक्षक की वास्तविक सफलता तब होती है, जब किसी सामान्य परिवार का बच्चा आगे बढ़कर देश की पहचान बने और यह कहे कि सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने का विश्वास उसे अपने गुरु से मिला।

विद्यार्थियों की संभावनाओं को पहचानना शिक्षक का अहम दायित्व

राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थी के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानना, उसमें आत्मविश्वास जगाना और आगे बढ़ने का साहस देना शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, समझने, प्रश्न करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना भी है।

उन्होंने कहा कि भविष्य की शिक्षा में तकनीक की शक्ति और शिक्षक की संवेदना का समन्वय आवश्यक है। तकनीक सीखने के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उन अवसरों का सही दिशा में उपयोग कराने की जिम्मेदारी शिक्षक ही निभाएगा।

शैलेश मटियानी के नाम पर दिया जाता है पुरस्कार

राज्यपाल ने हिन्दी साहित्य के संवेदनशील कथाकार शैलेश मटियानी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि शैलेश मटियानी ने पहाड़ के सामान्य जन के जीवन, संघर्ष और संवेदनाओं को अपनी लेखनी के माध्यम से सशक्त स्वर दिया। उनके नाम पर प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार शिक्षकों के समर्पण, संघर्ष, संवेदनशीलता और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का सम्मान है।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि करीब 70 हजार शिक्षकों में से 19 शिक्षकों का चयन करना चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने सभी चयनित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके उत्कृष्ट कार्य और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रमाण है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कथाकार शैलेश मटियानी के नाम पर प्रदान किया जाता है। उन्होंने हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्यालयी पुस्तकालयों में शैलेश मटियानी की प्रमुख कृतियां उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि विद्यार्थी उनके साहित्य और लेखन से परिचित हो सकें तथा उत्तराखण्ड की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकें।

प्रारंभिक शिक्षा श्रेणी में 12 शिक्षक सम्मानित

शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार की प्रारंभिक शिक्षा श्रेणी में कुल 12 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनमें पौड़ी गढ़वाल से विष्णुपाल सिंह नेगी, चमोली से लखपत सिंह रावत, उत्तरकाशी से पृथ्वी सिंह रावत, देहरादून से वीरेंद्र सिंह रावत, हरिद्वार से रोबिन कुमार, टिहरी से महेश्वर प्रसाद सेमवाल, रुद्रप्रयाग से शशिकांत नौटियाल, चंपावत से जहीर अब्बास, ऊधमसिंहनगर से नौ सिंह, नैनीताल से डॉ. श्वेता मजगांई, पिथौरागढ़ से विक्रम सिंह परिहार और अल्मोड़ा से त्रिलोक सिंह अधिकारी शामिल हैं।

माध्यमिक शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान श्रेणी के विजेता

माध्यमिक शिक्षा श्रेणी में छह शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इनमें पौड़ी गढ़वाल से नरेंद्र सिंह नेगी, चमोली से डॉ. सुमन ध्यानी शर्मा, देहरादून से डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव, हरिद्वार से कमलेश पंवार, चंपावत से नवीन चंद्र पंत और नैनीताल से विशन सिंह मेहता शामिल हैं।

प्रशिक्षण संस्थान श्रेणी में उत्तरकाशी के डॉ. सुबोध सिंह बिष्ट को सम्मानित किया गया। वहीं, विशेष सम्मान के तहत राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता चंपावत की मंजूबाला को सम्मान प्रदान किया गया।

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