लेख-विचार

मानसून का कहर बना राष्ट्रीय चुनौती: गंगा उफान पर, गुजरात से असम तक जनजीवन प्रभावित

कांतिलाल मांडोत देश में मानसून एक बार फिर अपने रौद्र रूप में दिखाई दे रहा है। उत्तर भारत से लेकर पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर भारत...

एआई की बढ़ती स्वायत्तता: तकनीकी प्रगति के साथ सुरक्षा और नैतिकता की नई चुनौती

तकनीक का विकास मानव जीवन को सरल, सुरक्षित और अधिक सक्षम बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। लेकिन जब यही तकनीक अपने निर्धारित...

भविष्य की आहट: विदेशी शक्तियों और भितरघातियों की जुगलबंदी विफल

डॉ. रवीन्द्र अरजरिया लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिक अधिकारों का मूल आधार होते हैं, परंतु जब असहमति की आड़ में विदेशी धन, अत्याधुनिक...

नीट से डॉक्टर बनने तक: क्या हमारी मेडिकल शिक्षा संवेदनशील चिकित्सक तैयार कर रही है?

डॉ. सत्यवान सौरभ देश में जब भी नीट (NEET) परीक्षा होती है, चर्चा केवल परिणामों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने...

जंतर-मंतर से संसद तक मार्च: शिक्षा सुधार का आंदोलन या राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन?

कांतिलाल मांडोत दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाले गए तथाकथित "चलो संसद" ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि...

रेलवे स्टेशनों के सूने बुक स्टॉल : क्या डिजिटल युग में पढ़ने की संस्कृति बदल रही है?

डॉ. सत्यवान सौरभ भारतीय रेलवे स्टेशन केवल यात्रियों के आवागमन के केंद्र नहीं रहे हैं, बल्कि वे लंबे समय तक देश की सांस्कृतिक और बौद्धिक...

पुरस्कारों का अर्थशास्त्र : जब साहित्यिक सम्मान पारदर्शिता के कठघरे में खड़े हों

डॉ. प्रियंका सौरभ एक साहित्यिक संस्था ने कविता, कहानी, व्यंग्य सहित सात विधाओं में कुल 21 पुरस्कारों की घोषणा की। प्रत्येक विधा में प्रथम पुरस्कार...

विश्व जनसंख्या दिवस : बढ़ती आबादी और सतत विकास की चुनौती

विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष: मानव सभ्यता के विकास का इतिहास जितना पुराना है, जनसंख्या वृद्धि का इतिहास भी उतना ही पुराना है। प्राचीन...

आर्थिक स्वतंत्रता, समानता और परिवार: अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी साझेदारी

डॉ. प्रियंका सौरभ भारतीय समाज में परिवार केवल रक्त संबंधों का समूह नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग, साझेदारी और पारस्परिक उत्तरदायित्व की एक जीवंत संस्था रहा...

आदर्श चंपावत से विश्व की आध्यात्मिक राजधानी तक: मुख्यमंत्री धामी का विकास विजन

भारतीय लोकतंत्र में ऐसे अवसर कम आते हैं, जब किसी जनप्रतिनिधि की विकास-दृष्टि केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर एक व्यापक सामाजिक, सांस्कृतिक और...