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वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना से प्रशांत ने शुरू किया होटल, 99.32 लाख रुपये की परियोजना से बना आत्मनिर्भरता का उदाहरण

नैनीताल, 20 अगस्त। उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए संचालित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना युवाओं को पर्यटन आधारित स्वरोजगार से जोड़ने में प्रभावी साबित हो रही है। हल्द्वानी के ऊंचापुल निवासी प्रशांत बडसीलिया ने इस योजना के तहत लगभग 99.32 लाख रुपये की परियोजना से होटल शुरू किया है। उनके प्रयास ने आत्मनिर्भर बनने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का भी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

पर्यटन स्वरोजगार योजना से मिला व्यवसाय शुरू करने का अवसर

प्रशांत बडसीलिया के अनुसार, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना से मिले सहयोग ने उन्हें होटल व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। होटल शुरू होने के बाद उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है और उनका कारोबार भी आगे बढ़ रहा है।

प्रशांत ने बताया कि हल्द्वानी की भौगोलिक स्थिति होटल व्यवसाय के लिए अनुकूल है। नैनीताल, भीमताल और मुक्तेश्वर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों का प्रवेश द्वार होने के कारण हल्द्वानी में पर्यटकों के लिए होटल व्यवसाय की अच्छी संभावनाएं हैं। उन्हें भी अपने प्रतिष्ठान के संचालन में इस स्थिति का लाभ मिल रहा है।

युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही योजना

प्रशांत का कहना है कि यह योजना युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय अपना उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रही है। उनके अनुसार, योजना के माध्यम से युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

राज्य सरकार का उद्देश्य पर्यटन संसाधनों को स्थानीय युवाओं की आजीविका से जोड़ना है। इसके माध्यम से रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा

प्रशांत बडसीलिया की सफलता को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और स्वरोजगार की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण माना जा रहा है। लगभग 99.32 लाख रुपये की परियोजना से होटल व्यवसाय शुरू कर उन्होंने पर्यटन क्षेत्र में अपनी आजीविका का माध्यम तैयार किया है।

उनका अनुभव यह दर्शाता है कि पर्यटन से जुड़े स्थानीय संसाधनों और स्वरोजगार के अवसरों को जोड़कर युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

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