नई दिल्ली, 06 सितंबर। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित ‘अंतर-संसदीय संघ युवा सांसदों का वैश्विक सम्मेलन’ के 12वें संस्करण में डिजिटल युग में डिजिटल पहुंच और अधिकारों के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक पहुंच, सुरक्षा और अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए।
राघव चड्ढा ने रविवार को सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट के जरिए सम्मेलन में अपने संबोधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक अरब से अधिक लोगों के डिजिटल रूप से जुड़े होने और एकीकृत भुगतान व्यवस्था के जरिए तत्काल भुगतान रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनने के साथ भारत ने यह दिखाया है कि डिजिटल प्रगति और समावेश एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
तकनीक से बढ़े पहुंच और अवसर
राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया कि तकनीक किस तरह लोगों की पहुंच बढ़ा रही है और ऐसा भविष्य तैयार कर सकती है, जो सभी को जोड़ता हो। उन्होंने कहा कि नए आविष्कार लोगों का शोषण किए बिना होने चाहिए और सुरक्षा ऐसी होनी चाहिए जो नियंत्रण का माध्यम न बने।
उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर की असली परीक्षा यह नहीं है कि मशीनें कितनी अधिक स्मार्ट बनती हैं। असली सवाल यह है कि क्या सबसे गरीब जिले में सबसे सस्ता फोन रखने वाले व्यक्ति को भी वही डिजिटल पहुंच, सुरक्षा और अवसर मिलते हैं, जो समाज के अन्य लोगों को उपलब्ध हैं।
उज्बेकिस्तान की संसद की चेयरपर्सन से मुलाकात
इससे पहले शनिवार को राघव चड्ढा ने उज्बेकिस्तान की संसद की सीनेट की चेयरपर्सन तंजिला नारबायेवा से समरकंद में मुलाकात की। उन्होंने बताया कि उन्हें 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के लिए तंजिला नारबायेवा को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित करने का अवसर मिला।
यह फोरम इस वर्ष अक्टूबर में दिल्ली में भारतीय संसद की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा। मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों पर बातचीत की।
राघव चड्ढा के अनुसार, तंजिला नारबायेवा ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सफल उज्बेकिस्तान यात्रा के बारे में गर्मजोशी से बात की और निमंत्रण में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।
युवा सांसदों के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व
राघव चड्ढा ने 3 सितंबर को एक पोस्ट में बताया था कि उन्हें 4 से 6 सितंबर तक समरकंद में आयोजित ‘अंतर-संसदीय संघ युवा सांसदों का वैश्विक सम्मेलन’ के 12वें संस्करण में भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के लिए नामित किए जाने पर भारत के उपराष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि 1889 में स्थापित और जिनेवा में मुख्यालय वाला अंतर-संसदीय संघ राष्ट्रीय संसदों का दुनिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा संगठन है। इसमें 180 सदस्य संसदें और 15 सहयोगी सदस्य शामिल हैं।
मानवाधिकार और डिजिटल सुरक्षा पर चर्चा
इस वर्ष सम्मेलन का विषय ‘मुश्किल दौर में सभी के लिए मानवाधिकारों, न्याय और सम्मान को फिर से स्थापित करना’ है। तीन दिवसीय सम्मेलन में दुनिया भर के युवा विधायक संघर्ष के दौरान युवाओं के अधिकारों, डिजिटल अधिकारों और ऑनलाइन सुरक्षा, जलवायु के प्रति लचीलेपन और न्याय तथा युवाओं के लिए आर्थिक अवसरों जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे हैं।
राघव चड्ढा ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी आबादी भी बहुत युवा है। ऐसे में इन सभी मुद्दों पर भारतीय संसद के पास साझा करने के लिए बहुत कुछ है और सीखने के लिए भी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सफल उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद भारत-उज्बेकिस्तान साझेदारी के संसदीय पक्ष में इस गति को आगे बढ़ाने में अपने प्रतिनिधिमंडल की भूमिका निभाना उनके लिए सौभाग्य की बात है।



