नई टिहरी, 22 अगस्त। भाजपा के प्रदेश मंत्री नलिन भट्ट ने नई दिल्ली में गढ़वाल सांसद एवं राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी से मुलाकात कर शिक्षकों की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से जुड़ी समस्या से अवगत कराया। उन्होंने वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की। सांसद अनिल बलूनी ने समस्या के निराकरण का भरोसा दिया।
2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट की मांग
भाजपा प्रदेश मंत्री नलिन भट्ट ने सांसद अनिल बलूनी को सौंपे ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के अनुसार कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए अब अपनी सेवाएं नियमित रखने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा।
नलिन भट्ट ने कहा कि इस व्यवस्था में वे शिक्षक भी शामिल हैं, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2010 से पहले हुई थी। उस समय शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं था। ऐसे में उस अवधि में नियुक्त शिक्षकों के सामने अब नई परिस्थिति उत्पन्न हो गई है।
सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे कई शिक्षक
ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त अनेक शिक्षक अब अपनी सेवा के अंतिम पड़ाव में हैं और उनमें से अधिकांश सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं। ऐसे में उच्चतम न्यायालय के आदेश के कारण इन शिक्षकों में मानसिक दबाव और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
नलिन भट्ट ने शिक्षकों की स्थिति को देखते हुए इस मामले में समाधान निकालने की अपील सांसद अनिल बलूनी से की। उन्होंने वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने की मांग रखी।
सांसद ने दिया समस्या के समाधान का भरोसा
सांसद अनिल बलूनी ने शिक्षकों की समस्या पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि इसके लिए रास्ता निकाला जाएगा। मुलाकात के दौरान शिक्षकों से जुड़ी टीईटी की अनिवार्यता और वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की स्थिति को लेकर चर्चा हुई।



