नैनीताल, 22 अगस्त। संदिग्ध जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति के मामले में नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. मनीषा कायथ का हल्द्वानी तहसील से वर्ष 2014 में जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। जिला स्तरीय जांच समिति की संस्तुति के बाद तहसीलदार को प्रमाण पत्र जब्त करने तथा संबंधित विभागों को आगे की विधिसम्मत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायत के बाद हुई जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह जांच अनिल कुमार कंबोज की शिकायत पर शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि डॉ. मनीषा कायथ का मूल निवास हिमाचल प्रदेश के सोलन जनपद में है। वहां उन्हें वर्ष 1999 में छिब्बे जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था।
विवाह के बाद उन्होंने हल्द्वानी तहसील से उत्तराखंड में धोबी जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उनका चयन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पद पर हुआ था।
जांच समिति ने किया न्यायिक निर्णयों का परीक्षण
वर्तमान में डॉ. मनीषा कायथ चंपावत जनपद के पाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर कार्यरत हैं। तीन अगस्त को जिला स्तरीय जांच समिति की बैठक में संबंधित दस्तावेजों के साथ सर्वोच्च न्यायालय के रंजना कुमारी बनाम उत्तरांचल राज्य (2013) और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अंशु सागर बनाम उत्तराखंड राज्य (2025) के निर्णयों का परीक्षण किया गया।
समिति ने माना कि विवाह के बाद दूसरे राज्य में स्थानांतरण के आधार पर संबंधित राज्य की सेवाओं में अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता।
प्रमाण पत्र निरस्त, विभागों को कार्रवाई के निर्देश
जिला स्तरीय जांच समिति की संस्तुति के आधार पर जिलाधिकारी ने 22 जनवरी 2014 को जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। साथ ही तहसीलदार को प्रमाण पत्र जब्त करने और संबंधित विभागों को आगे की विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि प्रशासन सभी मामलों में पारदर्शिता और विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।



