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अदवाणी में चीड़ के हरे पेड़ों के कटान का विरोध, ग्रामीणों ने दी दूसरे चिपको आंदोलन की चेतावनी

नई टिहरी, 13 अगस्त। नरेंद्रनगर ब्लॉक के तहत आरक्षित वन क्षेत्र में अदवाणी गांव के ग्रामीणों ने फायर लाइन बनाने के नाम पर चीड़ के हरे पेड़ों के कटान का विरोध किया है। ग्रामीणों ने खुली बैठक कर बड़ी संख्या में पेड़ों के काटे जाने पर चिंता जताई और तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पेड़ों का कटान नहीं रोका गया तो क्षेत्र में दोबारा चिपको आंदोलन शुरू किया जाएगा।

फायर लाइन के लिए पेड़ों के कटान पर ग्रामीणों का विरोध

गुरुवार को अदवाणी के ग्रामीण आरक्षित वन क्षेत्र में एकत्र हुए, जहां ग्राम प्रधान विजय सिंह भंडारी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। ग्रामीणों ने चीड़ के हरे पेड़ों के कटान पर रोष जताते हुए कहा कि फायर लाइन की आड़ में पेड़ों को काटना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए पेड़ काटने के लिए पहुंचे श्रमिक वापस लौट गए। इसके बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के एसडीओ किशोर नौटियाल ने ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने बताया कि फायर लाइन बनाने के लिए चीड़ के पेड़ों का कटान किया जा रहा है। इस पर ग्रामीणों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और कहा कि वे पेड़ों को कटने नहीं देंगे।

पर्यावरणविद और चिपको आंदोलन से जुड़े लोगों ने जताई चिंता

पर्यावरणविद विजय जड़धारी ने सवाल उठाया कि ऐसी फायर लाइन किस प्रकार बनाई जा रही है, जिसके लिए चीड़ के सैकड़ों बड़े हरे पेड़ों को काटे जाने की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1978 में विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन अदवाणी के इसी जंगल में चला था। जिस जंगल को उस समय बचाया गया था, आज उसी के पेड़ों को काटा जा रहा है, जो उचित नहीं है।

चिपको नेत्री बचनी देवी के पुत्र किशन सिंह रावत ने कहा कि उनकी माताजी ने यहां जंगलों को बचाने के लिए अपने परिवार तक से विद्रोह किया था और जीवन के अंतिम समय तक जंगलों के संरक्षण के लिए समर्पित रहीं। उन्होंने कहा कि मां की प्रेरणा से वे भी जंगलों को कटने नहीं देंगे।

ग्रामीणों ने पारित किया दूसरे चिपको आंदोलन का प्रस्ताव

बैठक में ग्रामीणों ने प्रस्ताव पारित किया कि यदि जंगल काटा गया तो क्षेत्र में दूसरी बार चिपको आंदोलन चलाया जाएगा। ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद एसडीओ किशोर नौटियाल और रेंजर शैलेंद्र सिंह नेगी ने उन्हें आश्वासन दिया कि फिलहाल जंगल नहीं काटा जाएगा।

बताया गया कि अदवाणी क्षेत्र में 15 मीटर चौड़ी फायर लाइन बनाने के लिए 150 से अधिक चीड़ के हरे पेड़ों को काटे जाने की स्वीकृति है। इनमें से कुछ पेड़ वन विभाग की ओर से कटवाए भी जा चुके हैं। ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने विरोध शुरू किया।

बैठक में जन जागृति संस्थान के अध्यक्ष अरण्य रंजन, दयाल भाई, नरेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, रविंद्र रावत, विजयपाल सिंह, रणजीत सिंह, कुलबीर सिंह रावत, पूर्व प्रधान प्रमिला देवी और सुवधा देवी मौजूद रहे।

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