नई दिल्ली, 24 जुलाई। देशभर में पेपर लीक के मामलों पर सख्ती बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर दंड के प्रावधान वाला नया कानून लाने की तैयारी तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए विधेयक के मसौदे पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में विचार किया जाएगा। सरकार की योजना इसे संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में पेश करने की है।
इसी बीच केंद्र सरकार की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर दिया है। इससे ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक की घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से छात्रों की वर्षों की मेहनत प्रभावित होती है और अभिभावकों को भी गहरी मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि नीट परीक्षा में पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद पिछले लगभग ढाई महीनों में सरकार ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है। जांच एजेंसियों ने दोषियों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि विद्यार्थियों का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो, इसलिए कम से कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई।
उन्होंने बताया कि सरकार ने अपने सभी संसाधनों का उपयोग करते हुए 22 लाख से अधिक विद्यार्थियों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित कराई, जिसके परिणाम 19 जुलाई को घोषित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सफल विद्यार्थियों की खुशी सरकार के लिए संतोष का विषय है, लेकिन केवल परीक्षा कराना पर्याप्त नहीं है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, उन्होंने संबंधित विभागों को फास्ट ट्रैक कोर्ट और सख्त दंड संबंधी कानूनी मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए थे। विभागों ने उसी दिन मसौदा तैयार कर प्रस्तुत कर दिया, जिस पर शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा होगी। मंत्रियों के सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा और संसद में विधेयक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
उधर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने जारी आदेश में कहा है कि पेपर लीक तथा परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए राउज एवेन्यू न्यायालय परिसर में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किया गया है। इस अदालत की विशेष न्यायाधीश के रूप में सुश्री अनु ग्रोवर बालिगा की नियुक्ति की गई है। इससे पहले वह तीस हजारी अदालत के मध्यस्थता केंद्र की प्रभारी न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थीं।
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, राउज एवेन्यू न्यायालय में लंबित तथा भविष्य में दर्ज होने वाले पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के सभी मामलों की सुनवाई अब इसी विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। माना जा रहा है कि इससे ऐसे मामलों का तेजी से निस्तारण होगा और दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
केंद्र सरकार के प्रस्तावित कानून और दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने तथा पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

