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पीओजेके वापस लेना ही भारत-पाकिस्तान के बीच एकमात्र लंबित मुद्दा : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली, 27 जुलाई। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के विभाजन को इतिहास की सबसे बड़ी भूल बताते हुए कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) को वापस लेना ही भारत और पाकिस्तान के बीच एकमात्र लंबित मुद्दा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में व्यापक बदलाव आया है और अब देश केवल जवाबी प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी बाहरी आक्रमण का निर्णायक और प्रभावी उत्तर देने में सक्षम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली स्थित कश्मीरी सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 27वें कारगिल विजय दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन जम्मू-कश्मीर पीपल्स फोरम और पीओजेके यूथ फोरम द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। समारोह में सांसद बांसुरी स्वराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक कर्नल के.के. शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल सैन्य जीत का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा के लिए देश की अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध से मिली सीख आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति निरंतर सतर्कता और एकजुटता की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 का कारगिल युद्ध किसी एक घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि यह उन परिस्थितियों की श्रृंखला का हिस्सा था जिसकी शुरुआत देश के विभाजन के साथ हुई थी। उनके अनुसार विभाजन के कारण लाखों लोगों को विस्थापन, हिंसा और पीड़ा का सामना करना पड़ा तथा दोनों देशों के बीच लंबे समय तक अविश्वास और संघर्ष की स्थिति बनी रही।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 1947, 1965, 1971 और कारगिल युद्ध के साथ-साथ सीमा पार आतंकवाद और छद्म युद्ध भी उसी सोच की निरंतरता रहे हैं। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के पलायन को स्वतंत्र भारत की सबसे गंभीर मानवीय त्रासदियों में से एक बताते हुए कहा कि इस पीड़ा को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई है। सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ सुरक्षा तंत्र को आधुनिक बनाया गया है। अब देश की रणनीति केवल हमलों का जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सक्रिय और निर्णायक कार्रवाई पर आधारित है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस नीति परिवर्तन से देश का आत्मविश्वास बढ़ा है और भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की क्षमता और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था ही विकास और स्थायी शांति की आधारशिला है।

जम्मू-कश्मीर में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में प्रदेश में आधारभूत संरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। कश्मीर घाटी को रेल संपर्क से जोड़ने, विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल के निर्माण, नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों की स्थापना, सिंचाई परियोजनाओं को गति देने तथा अन्य विकास योजनाओं के कारण आम नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है।

उन्होंने कहा कि शांति का वातावरण विकास को गति देता है और विकास स्वयं स्थायी शांति को मजबूत करता है। जम्मू-कश्मीर में दोनों प्रक्रियाएं एक-दूसरे को सशक्त बना रही हैं, जिससे लोगों का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास प्रक्रिया में लगातार बढ़ा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए देशवासियों से राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और अखंडता के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कारगिल के वीरों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता रहेगा।

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