संयुक्त राष्ट्र, 12 सितंबर। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर आतंकवाद से निपटने के लिए सुरक्षा रणनीतियों को बदलती तकनीकी चुनौतियों के अनुरूप आधुनिक बनाने पर जोर दिया है। सुरक्षा परिषद ने कहा कि आतंकवाद अब भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
आतंकवाद के खिलाफ रणनीतियों में बदलाव की जरूरत
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से एक प्रेस वक्तव्य अपनाया। इसमें परिषद ने आतंकवाद का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इसे अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
सुरक्षा परिषद ने कहा कि आतंकवादियों की कार्यप्रणाली में बदलाव के साथ उनके खिलाफ अपनाई जाने वाली रणनीतियों को भी विकसित करना जरूरी है। आतंकवादी अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह, सामाजिक माध्यम और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में इन तकनीकों के दुरुपयोग से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।
9/11 हमलों की 25वीं वर्षगांठ पर बैठक
फ्रांस की पहल पर आयोजित यह बैठक वर्ष 2001 में अलकायदा द्वारा किए गए आतंकी हमलों की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर बुलाई गई थी। बैठक के दौरान वैश्विक शक्ति संघर्षों के कारण अक्सर अलग-अलग रुख अपनाने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आतंकवाद के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई।
सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के पीड़ितों की स्मृति में एक मिनट का मौन रखा। इन हमलों में सबसे बड़ा हमला न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स पर हुआ था। इस हमले में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता पर अमेरिका का जोर
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वाल्श ने कहा कि सुरक्षा परिषद में शामिल प्रत्येक देश किसी न किसी रूप में आतंकवाद का शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि शायद यही कारण है कि जिस परिषद में अक्सर विभिन्न मुद्दों पर मतभेद सामने आते हैं, वहां आतंकवाद की निंदा उन विषयों में शामिल है, जिन पर सभी देश एक साथ और सर्वसम्मति से खड़े होते हैं।
वाल्श ने कहा कि आतंकवाद आज भी वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना होगा।
अमेरिकी सेना की विशेष ग्रीन बेरेट इकाई में अफगानिस्तान में सेवा दे चुके वाल्श ने कहा कि 9/11 हमलों के बाद से दुनिया भर में लाखों लोग आतंकवादी घटनाओं में मारे गए, घायल हुए, विस्थापित हुए, आतंकवादी संगठनों में भर्ती किए गए या आतंकवाद के साये में जीवन जीने को मजबूर हुए हैं।
आतंकवादियों द्वारा तकनीक और वित्तीय प्रणालियों के दुरुपयोग पर चिंता
सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जेरोम बोनाफोंट ने बैठक में कहा कि आतंकवादी संगठन नई तकनीकों और आधुनिक वित्तीय प्रणालियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवादी मानव समाज की तकनीकी उपलब्धियों को ही उसके खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां और अधिक जटिल हो गई हैं।
बैठक से पहले सुरक्षा परिषद के सदस्य न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्मारक भी पहुंचे। यहां काले ग्रेनाइट पर अंकित हमलों के पीड़ितों के नामों के बीच बने स्मृति कुंड के सामने उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित की।
गुटेरेस ने आतंकवाद मुक्त भविष्य की साझा प्रतिबद्धता दोहराई
इस बीच, ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 9/11 के आतंकी हमलों को “मानवता पर हमला” बताया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने पूरी दुनिया पर स्थायी प्रभाव छोड़ा है।
गुटेरेस ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए आतंकवाद मुक्त भविष्य के निर्माण के लिए साझा प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता और सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस तरह, 9/11 हमलों की 25वीं वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आतंकवाद के बदलते स्वरूप और आधुनिक तकनीकों के बढ़ते दुरुपयोग के बीच वैश्विक स्तर पर सुरक्षा रणनीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।



