नई दिल्ली, 12 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे कई विश्व नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान स्वागत समारोह की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर की भव्य तस्वीर दिखाई दी।
भारत मंडपम में विश्व नेताओं का स्वागत
शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सहित अन्य नेताओं का स्वागत किया।
स्वागत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को रामनाथस्वामी मंदिर की तस्वीर और उसके महत्व के बारे में संक्षेप में जानकारी देते हुए भी देखा गया। उन्होंने भारत मंडपम पहुंचे अन्य नेताओं से भी बातचीत की और पृष्ठभूमि में दिखाई दे रहे मंदिर के बारे में जानकारी साझा की।

रामनाथस्वामी मंदिर का धार्मिक महत्व
तमिलनाडु के रामेश्वरम में पंबन द्वीप पर स्थित रामनाथस्वामी मंदिर हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। यह भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में शामिल है।
अपने भव्य गलियारों, जटिल स्थापत्य कला और विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर आस्था, समृद्ध संस्कृति और सदियों पुराने इतिहास का प्रतीक माना जाता है। हिंदू परंपरा में भी इस मंदिर का विशेष महत्व है और इसका संबंध रामायण से जोड़ा जाता है।
यह तीर्थस्थल शुद्धिकरण और आध्यात्मिक परिवर्तन के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है। देश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में रामनाथस्वामी मंदिर की विशेष पहचान है।
नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
भारत शनिवार और रविवार, 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ-साथ आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मानवता प्रथम’ की भावना पर आधारित जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है।

जन-केंद्रित ब्रिक्स पर पीएम मोदी का जोर
शनिवार को नई दिल्ली में ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर आयोजित ब्रिक्स के उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सभी नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता जन-केंद्रित और मानवता प्रथम के दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने कहा कि लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता भारत की प्राथमिकताएं रही हैं। साथ ही, ब्रिक्स सहयोग को आम लोगों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं और लगभग 30 शहरों में विभिन्न देशों की टीमों का स्वागत करने का अवसर मिला।
ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान स्थापित की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समूह किसी के खिलाफ नहीं है और उसे सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने के दृष्टिकोण के साथ काम करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने ‘ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन’ तंत्र स्थापित करने का भी आह्वान किया। इससे ब्रिक्स सहयोग को निरंतर आगे बढ़ाने और लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन पर जोर देने की दिशा स्पष्ट होती है।



