नई दिल्ली, 12 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का विमोचन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए उनकी जीवन यात्रा को भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘अनमोल विरासत’ बताया।
पीएम मोदी ने आत्मकथा को बताया यादगार विरासत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए यादगार विरासत बनेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि कोविंद के जीवन संघर्ष और देश के लिए उनके योगदान को समझने के लिए यह पुस्तक जरूर पढ़ें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आत्मकथा देश की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने युवा पीढ़ी से रामनाथ कोविंद के अनुभवों और संघर्षों से सीख लेने का आह्वान किया।
संघर्ष व्यक्तिगत, जीत भारतीय लोकतंत्र की
पीएम मोदी ने कहा कि किताब का शीर्षक ही एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भले ही रामनाथ कोविंद के संघर्ष व्यक्तिगत रहे, लेकिन उनकी जीत भारतीय लोकतंत्र की जीत है।
प्रधानमंत्री ने कोविंद के राष्ट्रपति कार्यकाल से जुड़ी यादों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कोविंद प्रोटोकॉल से हटकर लोगों से मिलते थे और विदा करने के लिए कार के दरवाजे तक आते थे।
पीएम मोदी ने कोविंद के गांव परौंख जाने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां कोविंद ने अपने शिक्षकों के पैर छुए और गांव की मिट्टी को नमन किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह भारत के सांस्कृतिक मूल्यों की झलक थी, जिस पर हर भारतीय को गर्व है।
बचपन के संघर्ष का भी आत्मकथा में उल्लेख
प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद की आत्मकथा में लिखी एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बचपन में कोविंद के घर में आग लग गई थी। सामान बचाने के प्रयास में उनकी मां की जान चली गई थी।
पीएम मोदी ने कहा कि कम उम्र में मां को इस तरह खोने का दर्द बहुत बड़ा होता है। उन्होंने कहा कि कोविंद की जीवन यात्रा और संघर्षों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिल सकती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश को रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन का साक्षी बनने का अवसर मिला है और यह पुस्तक नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी साबित होगी।


