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राज्यसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, उत्पादकता रही महज 39.17 प्रतिशत

नई दिल्ली, 13 अगस्त। राज्यसभा का 271वां सत्र बृहस्पतिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा का मानसून सत्र लगातार हंगामे और व्यवधानों के बीच चला, जिसके कारण उच्च सदन की उत्पादकता महज 39.17 प्रतिशत रही। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सत्र के समापन से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में बताया कि सदन में कुल 37 घंटे 49 मिनट ही कामकाज हो सका।

हंगामे और गतिरोध के कारण प्रभावित हुआ कामकाज

राज्यसभा का मानसून सत्र अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और नीट प्रश्न पत्र लीक का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण लगातार बाधित रहा। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने इन मुद्दों को लेकर नारेबाजी की, जिससे सदन की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध दूर करने को लेकर सत्र के दौरान सहमति नहीं बन सकी। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने लगातार हुए हंगामे और व्यवधानों पर चिंता जताते हुए कहा कि इसके कारण सदन का कामकाज बार-बार बाधित हुआ और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक चर्चा नहीं हो पाई।

उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले व्यवधानों का असर अंततः लोगों के विश्वास और उनकी आकांक्षाओं पर पड़ता है। उन्होंने सभी सदस्यों से संसदीय आचरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने तथा सदन की गरिमा और पवित्रता की रक्षा करने का प्रयास करने की अपील की।

सभापति बोले- विधायी दायित्व पूरे किए

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि समय के नुकसान के बावजूद सदन ने अपने मूल विधायी दायित्वों को पूरा किया। उन्होंने कहा कि यदि सभी सदस्य सामूहिक रूप से सदन की कार्यवाही में भाग लेते, अपने महत्वपूर्ण सुझाव देते और सार्थक विचार-विमर्श में शामिल होते तो स्थिति निश्चित रूप से अलग होती।

सत्र के अंतिम दिन सभापति की अनुमति से शून्यकाल और प्रश्नकाल को स्थगित कर ‘खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा कराई गई। खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। लोकसभा में यह विधेयक बुधवार को ही पारित हो चुका था।

राज्यसभा में 12 विधेयकों पर हुई कार्रवाई

सत्र के दौरान उच्च सदन में 12 विधेयकों पर विचार किया गया और उन्हें पारित या वापस किया गया। इनमें राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान या इसके गान को दंडनीय बनाने संबंधी प्रावधान वाला राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक शामिल था।

इसके अलावा उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 38 करने के प्रावधान वाला सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 और केरल का नाम बदलकर केरलम् करने के प्रावधान वाला ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ भी शामिल रहा।

29 जुलाई को लंबी चर्चा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के जवाब के बाद सदन ने परीक्षा में सुधार से संबंधित ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी।

प्रश्नकाल और विशेष उल्लेख में भी सीमित कामकाज

सत्र के दौरान 285 तारांकित प्रश्न, शून्यकाल के तहत 380 विषय और विशेष उल्लेख के जरिए 380 मुद्दे उठाने का अवसर था। हालांकि, इनमें से केवल 16 प्रश्न, शून्यकाल के तहत 52 विषय और 93 विशेष उल्लेख ही सदन में लिए जा सके।

सभापति ने दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर उच्च सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ बजाया गया।

विपक्ष की मांगों को लेकर बना रहा गतिरोध

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे विपक्षी दलों के हंगामे के कारण दोनों सदनों में लगातार गतिरोध बना रहा।

सरकार ने कहा था कि वह छात्रों के विषय पर चर्चा कराने और इस पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए तैयार है। वहीं, विपक्ष का कहना था कि राम मंदिर से कथित चढ़ावा चोरी पर चर्चा, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर अमित शाह के जवाब और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग आपस में जुड़े हुए मुद्दे हैं। विपक्ष इन तीनों मांगों पर कायम रहा।

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