देहरादून, 22 जुलाई। उत्तराखंड सरकार ने राज्य की एकल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के दूसरे चरण का शुभारंभ कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को देहरादून स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में योजना के द्वितीय चरण की शुरुआत की। इस अवसर पर आठ जिलों की 212 पात्र महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए सहायता राशि की पहली किस्त जारी की गई।
महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मिलेगा डेढ़ लाख रुपये तक का अनुदान
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के तहत पात्र महिलाओं को अधिकतम दो लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। योजना में अनुदान की अधिकतम सीमा डेढ़ लाख रुपये निर्धारित की गई है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि लाभार्थी महिला को स्वयं वहन करनी होगी।
सरकार का उद्देश्य है कि एकल और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार और समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
महिलाओं को रोजगार मांगने वाली नहीं, रोजगार देने वाली बनाने का लक्ष्य
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार एकल, निराश्रित और जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से महिलाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार सृजन करने वाली शक्ति के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
इन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ
योजना के अंतर्गत विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा, किन्नर, परिवार पर आश्रित न रहने वाली अविवाहित महिलाएं और एसिड अटैक पीड़ित एकल महिलाएं पात्र हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए महिला का उत्तराखंड का मूल निवासी होना आवश्यक है। इसके साथ ही लाभार्थी की आयु 21 से 50 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है।
आठ जिलों की 212 महिलाओं को पहली किस्त जारी
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि योजना के दूसरे चरण में अल्मोड़ा, चंपावत, चमोली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और देहरादून जिले की 212 महिलाओं को स्वरोजगार के लिए पहली किस्त जारी की गई है।
उन्होंने बताया कि इन महिलाओं के लिए कुल 1 करोड़ 55 लाख 44 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा योजना के पहले चरण में लाभान्वित 276 महिलाओं को दूसरी किस्त के रूप में 1 करोड़ 20 लाख 76 हजार 875 रुपये की राशि भी जारी की गई है।
कृषि, पशुपालन और अन्य व्यवसायों से जुड़ेंगी महिलाएं
रेखा आर्या ने कहा कि योजना के माध्यम से महिलाएं कृषि, पशुपालन, ब्यूटी पार्लर, सिलाई सहित कई स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ रही हैं। सरकार इन क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन देकर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि महिला आर्थिक रूप से मजबूत होगी तो परिवार और समाज भी मजबूत होगा। योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके जीवन स्तर में सुधार करना है।
पहले चरण में भी सैकड़ों महिलाओं को मिला लाभ
योजना के पहले चरण की शुरुआत 10 फरवरी 2026 को की गई थी। इसमें छह जिलों की 484 महिलाओं को स्वरोजगार के लिए पहली किस्त के रूप में 3 करोड़ 45 लाख 34 हजार 500 रुपये की सहायता राशि जारी की गई थी।
द्वितीय चरण के शुभारंभ के साथ सरकार ने योजना के विस्तार और अधिक महिलाओं तक इसका लाभ पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
कार्यक्रम में विभागीय सचिव चंद्रेश कुमार, निदेशक बंसीलाल राणा, उपनिदेशक विक्रम सिंह, मोहित चौधरी, अंजना गुप्ता सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।


