नई टिहरी, 05 सितंबर। हिमालयी राज्य उत्तराखंड को रुद्राक्ष की खेती, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में अहम पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में रुद्राक्ष की व्यावसायिक खेती को संगठित रूप से बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
यह पहल टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में नेपाल गए प्रतिनिधिमंडल के विस्तृत अध्ययन के बाद सामने आई है। प्रतिनिधिमंडल में कृषि वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक लेखक डॉ. रमेश सिंह पाल और रुद्राक्ष विशेषज्ञ प्रिंस अग्रवाल शामिल थे।
नेपाल में रुद्राक्ष की खेती का किया अध्ययन
प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में रुद्राक्ष की खेती, फसल प्रबंधन, कटाई के बाद की प्रसंस्करण व्यवस्था और विपणन प्रणाली का विस्तृत अध्ययन किया। इसके साथ ही मिट्टी की विशेषताओं तथा किसान आधारित उत्पादन मॉडल का भी आकलन किया गया।
क्षेत्रीय अध्ययन और वैज्ञानिक आकलन के आधार पर प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड में रुद्राक्ष की खेती की संभावनाओं को लेकर बीती 9 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में दिए गए सुझावों पर विचार के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर 31 अगस्त को उप सचिव की ओर से उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग को व्यापक राज्य नीति तैयार करने के संबंध में पत्र जारी किया गया।
रुद्राक्ष को लाभकारी फसल बनाने का लक्ष्य
टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने बताया कि प्रस्तावित नीति का उद्देश्य रुद्राक्ष को व्यावसायिक रूप से लाभकारी फसल के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि भारत में घरेलू रुद्राक्ष की मांग पूरी करने के लिए आयात पर काफी निर्भरता है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत 95 प्रतिशत से अधिक रुद्राक्ष का आयात नेपाल और इंडोनेशिया से करता है। ऐसे में उत्तराखंड में रुद्राक्ष की संगठित खेती, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विधायक किशोर उपाध्याय के साथ डॉ. रमेश सिंह पाल और रुद्राक्ष विशेषज्ञ प्रिंस अग्रवाल ने प्रस्तावित नीति पहल का स्वागत किया।



