उत्तरकाशी, 28 अगस्त। रक्षाबंधन के पर्व पर भाई-बहन के स्नेह और सुरक्षा के रिश्ते को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए राइंका कॉलेज धौंतरी के बाल वैज्ञानिकों ने अनूठी पहल की। छात्र-छात्राओं ने समुद्रतल से करीब 2900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हरुंता बुग्याल पहुंचकर पेड़ों पर रक्षासूत्र बांधे और जंगल, जलस्रोत तथा बुग्यालों के संरक्षण का संकल्प लिया।
प्रकृति की खुली प्रयोगशाला बना हरुंता बुग्याल
रक्षाबंधन के अवसर पर हरुंता की हरी-भरी वादियां विद्यार्थियों के लिए प्रकृति की खुली प्रयोगशाला बनीं। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026-27 की शोध परियोजना के तहत बाल वैज्ञानिकों ने बुग्याल की वनस्पतियों, जैव-विविधता, मिट्टी, जलस्रोत और पारिस्थितिकी का अध्ययन किया।
विद्यार्थियों ने क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं का अवलोकन करने के साथ बुग्यालों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय प्रभावों और उनके संरक्षण की संभावनाओं से जुड़ी जानकारियां भी एकत्र कीं। पेड़ों पर रक्षासूत्र बांधकर विद्यार्थियों ने प्रकृति के साथ संरक्षण और संवेदनशीलता का संदेश दिया।
सुरेश भाई ने विद्यार्थियों से किया संवाद
इससे पहले रक्षासूत्र आंदोलन के प्रणेता पर्यावरणविद् सुरेश भाई ने विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने रक्षासूत्र आंदोलन की पृष्ठभूमि और वनों को बचाने में जनभागीदारी की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
सुरेश भाई ने विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने तथा स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने के लिए प्रेरित किया।
क्षेत्रीय अध्ययन से विकसित होता है वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विद्यालय के प्रधानाचार्य शांति प्रसाद नौटियाल ने कहा कि इस तरह के क्षेत्रीय अध्ययन विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर प्रकृति को समझने का अवसर देते हैं। इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होती है।
इस अवसर पर डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल और अरुण नौटियाल के मार्गदर्शन में कृष्णा, संध्या, रंजना, अमीषा, सुमित, गुलाब, सुधांशु, आकांक्षा और हिमांशु सहित अनेक विद्यार्थियों ने अभियान में भाग लिया।



