नैनीताल, 23 अगस्त। मल्लीताल के लेकव्यू कॉटेज क्षेत्र में जंगल से लाई गई जंगली वनस्पति के पकौड़े खाना एक परिवार के आठ लोगों पर भारी पड़ गया। पकौड़े खाने के कुछ ही देर बाद सभी की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उल्टी, पेट में मरोड़, चक्कर और नशे जैसे लक्षण महसूस होने लगे। इसके बाद सभी को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। उपचार के बाद अधिकांश मरीजों की हालत में सुधार है, जबकि दो बुजुर्गों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
झरका समझकर बनाए गए थे पकौड़े
परिजनों के अनुसार जंगल से लाई गई वनस्पति को स्थानीय स्तर पर खाई जाने वाली झरका या जरंग समझकर उसके पकौड़े बनाए गए थे। बताया गया कि सामान्य तौर पर इस वनस्पति की पत्तियों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इस बार पकौड़े बनाने में तनों का भी इस्तेमाल कर लिया गया।
पकौड़े खाने के कुछ ही समय बाद परिवार के सभी सदस्यों को नशा महसूस होने लगा। इसके बाद उल्टी, पेट दर्द और चक्कर की शिकायत सामने आई। हालत बिगड़ने पर सभी को उपचार के लिए बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले जाया गया।
प्रभावित लोगों में 90 वर्षीय महेश चंद्र साह, 83 वर्षीय सुरेंद्र लाल साह, 58 वर्षीय अनिल साह, 52 वर्षीय विक्रम साह, 46 वर्षीय कविता साह, 33 वर्षीय अनंता ठुलघरिया, 33 वर्षीय अक्षय कुमार और 23 वर्षीय मनीषा शामिल हैं।
अधिकांश मरीजों की हालत में सुधार
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एमएस दुग्ताल ने बताया कि सभी मरीजों को आपातकालीन वार्ड में भर्ती कर आवश्यक उपचार दिया गया। मरीजों को तरल पदार्थ भी दिए गए। उपचार के बाद अधिकांश लोगों की स्थिति स्थिर है। वहीं, महेश चंद्र साह और सुरेंद्र लाल साह को स्मरण संबंधी परेशानी के कारण चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
पौधे की पहचान को लेकर विशेषज्ञों की राय
कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. ललित तिवारी के अनुसार संबंधित पौधा फाइटोलेका एसीनोसा कहलाता है। इसकी पत्तियों और तनों में सैपोनिन तथा फाइटोलेको टॉक्सिन जैसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि सही पहचान और उचित विधि के बिना इसका सेवन पाचन तंत्र पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
हालांकि चिकित्सकीय स्तर पर धतूरे के सेवन की आशंका की भी जांच की जा रही है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञ परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
घटना के बाद चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जंगली वनस्पति का सेवन केवल उसके समान दिखने के आधार पर न करें। गलत पहचान गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।


