Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

Homeउत्तराखंड न्यूज़उत्तरकाशी न्यूज़कुपड़ा खड्ड में जान जोखिम...

कुपड़ा खड्ड में जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे बच्चे, जेसीबी के सहारे कराया जा रहा पार

उत्तरकाशी, 08 अगस्त। आपदा के एक साल बाद भी गीठ पट्टी क्षेत्र के कुपड़ा, कुनसाल और त्रिखली गांवों के ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कुपड़ा खड्ड पर मोटर पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बरसात के मौसम में ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को उफनते खड्ड को पार करने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। फिलहाल निर्माणाधीन बेली पुल के लिए मौके पर मौजूद जेसीबी मशीन की मदद से जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों और बच्चों को खड्ड के आर-पार कराया जा रहा है।

पुल क्षतिग्रस्त होने से एक साल से परेशानी

पिछले वर्ष आई आपदा में कुपड़ा खड्ड पर बना मोटर पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद पुल का पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। ग्रामीणों की आवाजाही बहाल करने के लिए बेली पुल का निर्माण शुरू किया गया, लेकिन पुल की एक ओर की पहुंच सड़क लंबे समय से अधूरी पड़ी है।

पहुंच मार्ग पूरा नहीं होने के कारण पुल का उपयोग अभी ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए पूरी तरह संभव नहीं हो पाया है।

उफनते खड्ड को पार कर स्कूल पहुंच रहे बच्चे

ग्रामीणों के अनुसार बरसात में कुपड़ा खड्ड का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। पहाड़ी से पत्थर और मलबा आने के कारण स्थिति और खतरनाक हो जाती है। इसके बावजूद स्कूली बच्चों को रोजाना इसी रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है।

हादसे की आशंका को देखते हुए निर्माण कार्य में लगी जेसीबी मशीन की मदद से ग्रामीणों और बच्चों को सुरक्षित तरीके से खड्ड पार कराया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन ध्यानी ने बताया कि बारिश और खड्ड में मलबा-पत्थर आने से पुल निर्माण में बाधा उत्पन्न हो रही है। विभाग को जल्द निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है।

ट्रॉली की व्यवस्था भी नहीं आई ग्रामीणों के काम

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष आपदा के बाद आवागमन के लिए ट्रॉली की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वह भी हटा दी गई। उनका कहना है कि ट्रॉली की व्यवस्था भी लंबे समय तक प्रभावी नहीं रही और ग्रामीणों को स्थायी आवागमन सुविधा नहीं मिल सकी।

ग्रामीणों की मांग है कि बेली पुल की अधूरी पहुंच सड़क का निर्माण जल्द पूरा कर पुल को आवागमन के लिए खोला जाए। उनका कहना है कि बरसात के दौरान स्कूली बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है और किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

Popular Articles