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हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुआ शुद्धिकरण यज्ञ

हल्द्वानी, 13 अगस्त। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। रैली समाप्त होने के बाद रामलीला मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ कराया गया। इसको लेकर कांग्रेस और आयोजक संगठन के बीच राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।

रैली के बाद कराया गया शुद्धिकरण यज्ञ

श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष गिरीश पांडे और पंडित मोहन शास्त्री ने बताया कि रैली के बाद रामलीला मैदान में शुद्धिकरण हवन कराया गया। उनका आरोप है कि रैली के दौरान धार्मिक नारों और टिप्पणियों के कारण मैदान की पवित्रता प्रभावित हुई।

गिरीश पांडे ने कहा कि यह यज्ञ पवित्र स्थान की पवित्रता बहाल करने के उद्देश्य से कराया गया। उन्होंने बताया कि इसका आयोजन श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की देखरेख में किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू संगठनों को लेकर मंच से की गई टिप्पणियों के कारण हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं। उनके मुताबिक, मंच पर ऐसे व्यक्ति को जगह दी गई जो हिंदू संगठनों की तुलना सांपों से करता है और मुस्लिम समुदाय से उन्हें खत्म करने की अपील करता है।

सद्बुद्धि के लिए यज्ञ का दावा

पंडित मोहन शास्त्री ने कहा कि रामलीला मैदान में सद्बुद्धि के लिए यज्ञ किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो-तीन दिन पहले धर्म-विरोधी तत्वों ने भगवान रामचंद्र के खिलाफ बयान दिए और हिंदू धर्म तथा उसके विनाश को लेकर बातें कहीं।

संगठन के सदस्यों ने मल्लिकार्जुन खड़गे को सनातन और हिंदू संगठनों का विरोधी बताते हुए कहा कि जिस मैदान में रामलीला का मंचन होता है, वहां ऐसे व्यक्ति के आने के बाद शुद्धिकरण यज्ञ कराया जाना जरूरी था। संगठन ने खड़गे के पिछले कथित सनातन विरोधी बयानों को भी अपने दावे का आधार बताया।

यज्ञ को लेकर सियासत तेज

कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हुए थे। उनके जाने के बाद रामलीला मैदान में हुए यज्ञ को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।

श्री राम सेना का कहना है कि यज्ञ उस स्थान की पवित्रता वापस लाने के लिए किया गया, जहां धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। वहीं, कांग्रेस इस कदम को राजनीतिक बता रही है।

फिलहाल, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण यज्ञ के बाद उत्तराखंड की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।

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