हरिद्वार, 31 अगस्त। पतंजलि का वेलनेस मॉडल भारत के साथ-साथ दुनिया के विभिन्न देशों के मरीजों के बीच भी अपनी पहचान बना रहा है। पतंजलि के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में 1.38 करोड़ से अधिक मरीजों का उपचार किया गया है। इनमें 88 देशों के 45 हजार से अधिक विदेशी मरीज शामिल हैं। यूरोप, मध्य-पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका सहित विभिन्न क्षेत्रों से मरीजों का पतंजलि पहुंचना आयुर्वेद आधारित उपचार के प्रति बढ़ते वैश्विक रुझान का संकेत माना जा रहा है।
डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड से उपचार व्यवस्था को मिल रहा आधार
पतंजलि आयुर्वेदिक अस्पताल, वेलनेस सेंटर और चिकित्सालयों में उपचार कराने वाले मरीजों का डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। संस्थान के अनुसार, इससे मरीजों के उपचार, फॉलोअप और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से संरक्षित करने में मदद मिल रही है।
इसी दिशा में पतंजलि आयुर्वेद, योग, नेचुरोपैथी, संतुलित आहार और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को जोड़कर समग्र स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। संस्थान का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ जोड़ना है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत इन राज्यों से पहुंच रहे अधिक मरीज
पतंजलि में देश के लगभग सभी राज्यों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, गुजरात, हरियाणा और महाराष्ट्र से आने वाले मरीजों की संख्या अन्य राज्यों की तुलना में अधिक बताई गई है।
वहीं, विदेशों से उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ने का दावा किया गया है। संस्थान के अनुसार कुल मरीजों में 99.7 प्रतिशत भारतीय और करीब 45 हजार विदेशी मरीज शामिल हैं।
आंकड़ों के मुताबिक उपचार कराने वाले मरीजों में 57 प्रतिशत पुरुष और 43 प्रतिशत महिलाएं हैं। वहीं, करीब 46 प्रतिशत मरीज 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के हैं।
5 हजार से अधिक डॉक्टर और 500 से ज्यादा वैज्ञानिक नेटवर्क से जुड़े
पतंजलि के अनुसार उसके स्वास्थ्य एवं अनुसंधान नेटवर्क में 5,000 से अधिक डॉक्टर और 500 से अधिक वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं। इसके अलावा 10 लाख से अधिक योग वॉलेंटियर, एक लाख से अधिक निशुल्क योग कक्षाएं और प्रतिदिन 15 हजार से अधिक निशुल्क ओपीडी संचालित किए जाने का दावा किया गया है।
संस्थान के मुताबिक अब तक 500 से अधिक शोध पत्र भी प्रकाशित किए जा चुके हैं। पतंजलि का कहना है कि अनुसंधान, डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड और आधुनिक तकनीक के समन्वय से आयुर्वेद को वैज्ञानिक आधार देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
डब्ल्यूएचओ और आयुष मंत्रालय की सोच के अनुरूप मॉडल का दावा
पतंजलि का कहना है कि उसका वेलनेस मॉडल पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। संस्थान के अनुसार, डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के समन्वय के जरिए आयुर्वेद को वैज्ञानिक आधार देने का प्रयास किया जा रहा है।
बढ़ती वैश्विक रुचि के बीच इसे भारत को आयुर्वेद और वेलनेस टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
आचार्य बालकृष्ण बोले- आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा में लाना लक्ष्य
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि का लक्ष्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड, गहन अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकों के समन्वय से आयुर्वेद को वैज्ञानिक प्रमाणिकता देने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऋषि परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संगम से ऐसा समग्र स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने का प्रयास है, जो सुलभ, किफायती और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समाधान उपलब्ध करा सके।
स्वामी रामदेव बोले- भारत बनेगा वैश्विक स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र
स्वामी रामदेव ने कहा कि योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, संतुलित आहार और वैज्ञानिक उपवास आधारित जीवनशैली करोड़ों लोगों के लिए स्वास्थ्य और नई आशा का माध्यम बन रही है।
उन्होंने कहा कि पतंजलि का संकल्प योग, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को एकीकृत कर ऐसा समग्र स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जो केवल रोगों के उपचार तक सीमित न हो, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य और संतुलित जीवन पर केंद्रित हो।
स्वामी रामदेव के अनुसार आने वाले समय में भारत को दुनिया का बड़ा स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र और समग्र चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनाने में पतंजलि अग्रणी भूमिका निभाएगा।


