नई दिल्ली, 27 जुलाई। प्रधानमंत्री मोदी ने देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है। यह समिति परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों का अध्ययन करेगी और भविष्य की परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।
रविवार शाम जारी अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान नहीं कर रही, बल्कि भविष्य की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर भी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विश्व प्रसिद्ध तकनीक विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में गठित यह उच्च स्तरीय समिति परीक्षा सुधारों के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी और ठोस सुझाव देगी, जिन पर सरकार प्रभावी ढंग से अमल करेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पहले ही परीक्षा से जुड़े अपराधों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष न्यायालयों की व्यवस्था कर चुकी है। इसके साथ ही संसद में कठोर प्रावधानों वाला नया कानून लाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं, ताकि प्रश्नपत्र लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
उन्होंने कहा कि देश की परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिस पर प्रत्येक विद्यार्थी और अभिभावक को पूरा भरोसा हो। इसके लिए पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा, जिससे परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता और मजबूत हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है और ऐसे दोषियों को कानून के दायरे में लाकर जेल भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। नई समिति की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और तकनीक समर्थ बनाया जाएगा, ताकि देश के करोड़ों विद्यार्थियों का विश्वास और मजबूत हो तथा उन्हें निष्पक्ष अवसर मिल सके।


