देहरादून, 27 जुलाई। देश-विदेश में अपनी विशिष्ट सुगंध और उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए पहचान रखने वाली पारंपरिक दून बासमती को फिर से उसकी पुरानी पहचान दिलाने की दिशा में देहरादून में व्यापक प्रयास शुरू हो गए हैं। वर्ष 2025 में सफल परीक्षण के बाद इस वर्ष जिले के 160 किसानों ने 75 हेक्टेयर क्षेत्र में दून बासमती 2.2 किस्म की रोपाई शुरू कर दी है। जिला प्रशासन, कृषि विभाग और ग्रामोत्थान के संयुक्त प्रयासों से इस पारंपरिक धान की खेती को पुनर्जीवित करने का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है।
दून बासमती के विस्तार से जुड़ रहे नए क्षेत्र
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि पहले जहां सहसपुर और विकासनगर क्षेत्र के किसान दून बासमती की खेती से जुड़े थे, वहीं अब रायपुर और डोईवाला के किसान भी इस अभियान का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल खेती का रकबा बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बीज संरक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और प्रभावी ब्रांडिंग के माध्यम से दून बासमती को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है।
पिछले वर्ष के सफल परीक्षण से बढ़ा किसानों का भरोसा
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि वर्ष 2025 में लगभग 65 हेक्टेयर क्षेत्र में किए गए परीक्षण के दौरान 100 से अधिक किसानों से 200 क्विंटल से अधिक दून बासमती धान ₹65 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था। इसके बदले किसानों के खातों में 13 लाख रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। इस सफलता के बाद किसानों का विश्वास बढ़ा है और इस वर्ष अधिक किसान इस खेती से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए रीप और हिलान्स के माध्यम से विपणन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसानों को बाजार की बेहतर पहुंच मिल सके।
सीड बैंक और वैज्ञानिक परीक्षण की तैयारी
दून बासमती के संरक्षण और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन विकासनगर में सीड बैंक और वैज्ञानिक परीक्षण सुविधा विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इससे गुणवत्तापूर्ण बीजों का संरक्षण होगा और किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा सकेंगे। साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित कर बाजार में इसकी विश्वसनीयता और मजबूत होगी।
घटते रकबे को फिर बढ़ाने की कोशिश
मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि एक समय दून बासमती की खेती करीब 550 हेक्टेयर क्षेत्र में होती थी, लेकिन समय के साथ इसका रकबा घटकर लगभग 150 से 200 हेक्टेयर तक सीमित रह गया। अब प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से इसकी खेती का दायरा फिर से बढ़ाने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।
किसानों को मिल रहा प्रशासन का सहयोग
हरबर्टपुर निवासी किसान सूर्य प्रकाश बहुगुणा ने बताया कि जिला प्रशासन, कृषि विभाग और ग्रामोत्थान किसानों को हर स्तर पर सहयोग प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र के 25 से 30 किसान इस पुनर्जीवन अभियान से जुड़े हैं और सभी किसानों में उत्साह का माहौल है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों और जिला प्रशासन की पहल से विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी दून बासमती को नया जीवन मिल रहा है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में खेती का क्षेत्र और बाजार दोनों का विस्तार होगा, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।
बीज से ब्रांडिंग तक समग्र रणनीति
दून बासमती के पुनर्जीवन के लिए प्रशासन ने केवल खेती बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि बीज संरक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण, किसानों से सीधी खरीद, बेहतर विपणन व्यवस्था और ब्रांड निर्माण जैसी पूरी श्रृंखला पर काम शुरू किया है। वर्ष 2025 के सफल परीक्षण और इस वर्ष बढ़े हुए खेती क्षेत्र ने यह संकेत दिया है कि दून बासमती एक बार फिर अपनी खोई पहचान हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, बेहतर विपणन और प्रभावी ब्रांडिंग पर लगातार काम किया गया, तो दून बासमती एक बार फिर उत्तराखंड की पहचान बनने के साथ किसानों की आय बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण फसल साबित हो सकती है।


