बोगोटा, 12 अगस्त। कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 213 हो गई है। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश में जुटे हैं। प्रशासन ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
काली और परेरा में सबसे ज्यादा तबाही
एजेंसियों और स्थानीय अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर जारी आंकड़ों के अनुसार, कोलंबिया भूकंप में सबसे ज्यादा मौतें काली शहर में हुई हैं, जहां 95 लोगों की जान गई है। इसके बाद परेरा में 66 लोगों की मौत हुई है।
वाये डेल कॉका प्रांत के काली को छोड़कर अन्य हिस्सों में 38 मौतों की रिपोर्ट है। वहीं, क्विब्डो में नौ और मनिजालेस में पांच लोगों की मौत हुई है। भूकंप के बाद आपातकालीन कर्मी मलबा और अन्य अवशेष हटाने में युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं।
‘कोलंबियन एसोसिएशन ऑफ कैपिटल सिटीज’ की रिपोर्ट के अनुसार, काली और परेरा सबसे गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। कई इमारतें ढह गई हैं और इनके मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका है। देश के दो बड़े शहरों बोगोटा और मेड्रिन में फिलहाल किसी बड़े नुकसान की रिपोर्ट नहीं है। हालांकि, अधिकारी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
दुर्गम चोको क्षेत्र में आया भूकंप
भूकंप का केंद्र पर्वतीय चोको क्षेत्र के सैन जोस डेल पाल्मार में बताया गया है। इसके झटके पश्चिमी कोलंबिया से लेकर राजधानी बोगोटा तक महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र बेहद दुर्गम इलाके में होने के कारण राहत और बचाव कार्यों के सामने मुश्किलें बनी हुई हैं।
सीमित सड़क संपर्क के कारण प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचने में देरी हो सकती है। बताया गया है कि इससे पांच लाख से अधिक निवासियों तक मदद पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भूकंप के केंद्र से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित परेरा और मनिजालेस भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इन क्षेत्रों में लगभग 5,000 इमारतों को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है।
राष्ट्रपति ने की राष्ट्रीय आपदा की घोषणा
गत सात अगस्त को राष्ट्रपति पद संभालने वाले अबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला ने राष्ट्रीय आपदा की घोषणा कर दी है। वहीं, वैश्विक नेताओं ने राहत एवं बचाव कार्यों में सहायता का आश्वासन दिया है।
इस प्राकृतिक आपदा ने बड़े भूकंपों से निपटने की कोलंबिया की तैयारियों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित होने और तीन टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर होने के कारण देश में भूकंप का खतरा बना रहता है।
भू-उपयोग मानचित्र और निर्माण मानकों पर सवाल
कोलंबियन एसोसिएशन ऑफ एनर्जी जियोलॉजिस्ट्स एंड जियोफिजिसिस्ट्स के निदेशक एवं भूवैज्ञानिक फ्लोवर रोड्रिगेज ने समाचार पत्र ‘एल पाइस’ से कहा कि अधिकारियों को भूकंप से जुड़े नियमों के आधार माने जाने वाले भूमि-उपयोग मानचित्रों को अपडेट करने की जरूरत है। उनके अनुसार, नागरिकों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट भू-उपयोग नीति जरूरी है।
एसोसिएशन ने जुलाई के अंत में सरकार से भूगर्भीय मैपिंग में सुधार की मांग की थी। साथ ही, इस बात पर चिंता जताई थी कि यह पता लगाने के लिए केंद्रीय डेटाबेस उपलब्ध नहीं है कि किन नगरपालिकाओं ने बुनियादी भूगर्भीय अध्ययन कराए हैं। ऐसा डेटा भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसे खतरों को कम करने में मदद कर सकता है।
पुरानी इमारतों की सुरक्षा भी बनी चिंता
कोलंबियन जियोलॉजिकल सर्विस के जॉन लोंडोनो ने ‘एल पाइस’ को बताया कि नए निर्माणों के लिए भूकंपरोधी नियमों में सुधार हुआ है, लेकिन कई पुरानी इमारतें अब भी निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।
उन्होंने कहा कि कम आय वाले लोगों और सोशल हाउसिंग में रहने वाली बड़ी आबादी के मकान इन मानकों को पूरा नहीं करते। इससे सबसे वंचित और संवेदनशील वर्ग के सामने बड़ा खतरा बना हुआ है।
सिविल इंजीनियर और भूकंप विज्ञान की प्रोफेसर गीना विलालोबोस ने भी घटिया निर्माण पद्धतियों को चिंता का विषय बताया। उनके अनुसार, कई बार समय या पैसा बचाने के लिए निर्माण परियोजनाओं में स्वीकृत नक्शों का पालन नहीं किया जाता और भूकंपरोधी नियमों का उल्लंघन होता है। इससे मजबूत इंजीनियरिंग मानकों का उद्देश्य भी प्रभावित होता है।



