हरिद्वार, 08 अगस्त। स्कूली शिक्षा को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भारतीय शिक्षा बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है। स्वामी रामदेव की मौजूदगी में बोर्ड ने तीन प्रमुख कौशल परिषदों के साथ समझौता ज्ञापन किए। नोएडा स्थित बोर्ड मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में पर्यटन एवं आतिथ्य, हस्तशिल्प एवं कालीन तथा हरित रोजगार के क्षेत्र में विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा देने पर सहमति बनी।
इन समझौतों का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े कौशल उपलब्ध कराना है, ताकि पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के सामने रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हों।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कौशल शिक्षा
भारतीय शिक्षा बोर्ड के अनुसार, इन समझौतों के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के अनुरूप विद्यालय स्तर से ही रोजगारोन्मुख व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।
बोर्ड का लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ऐसे व्यावहारिक कौशल से जोड़ना है, जिनका उपयोग वे भविष्य में रोजगार प्राप्त करने या अपना व्यवसाय शुरू करने में कर सकें।
स्वामी रामदेव बोले, शिक्षित होने के साथ दक्ष होना जरूरी
भारतीय शिक्षा बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रामदेव ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए केवल शिक्षित होना पर्याप्त नहीं है। उन्हें रोजगार प्राप्त करने और स्वरोजगार शुरू करने के लिए आवश्यक कौशल में दक्ष बनाना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे कौशल उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जिन्हें सीखकर वे कम समय में रोजगार हासिल कर सकें या अपने पैरों पर खड़े होकर स्वरोजगार शुरू कर सकें। इसी उद्देश्य से देश की प्रमुख कौशल परिषदों के साथ साझेदारी की जा रही है।
स्कूली शिक्षा में रोजगार केंद्रित पाठ्यक्रम
भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस एनपी सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 के अनुरूप बोर्ड ने रोजगार केंद्रित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि बोर्ड का प्रयास व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को अधिक सुलभ, किफायती और उपयोगी बनाना है, ताकि गुणवत्तापूर्ण कौशल आधारित शिक्षा अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच सके।
स्तर-1 से स्तर-10 तक मानकीकृत होंगे पाठ्यक्रम
एनपी सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के अंतर्गत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को स्तर-1 से स्तर-10 तक मानकीकृत किया गया है। इससे विद्यार्थियों और नियोक्ताओं को यह समझने में आसानी होगी कि किसी पाठ्यक्रम के बाद आगे की पढ़ाई और रोजगार के कौन-कौन से अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए स्तर-1 से स्तर-4 तक के पाठ्यक्रम तैयार और अनुकूलित किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान तथा विभिन्न क्षेत्रीय कौशल परिषदों के सहयोग से विकसित किया गया है। कुछ पाठ्यक्रम पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल की ओर से विकसित किए गए हैं।
पर्यटन से हरित रोजगार तक कई क्षेत्रों में अवसर
भारतीय शिक्षा बोर्ड ने पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल परिषद, हस्तशिल्प एवं कालीन क्षेत्र कौशल परिषद तथा हरित रोजगार कौशल परिषद के साथ समझौते किए हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ पहले से जारी साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
इन समझौतों के जरिए विद्यार्थियों को पर्यटन, आतिथ्य, हस्तशिल्प, कालीन उद्योग और हरित रोजगार जैसे क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने का रास्ता खुलेगा।
पढ़ाई और रोजगार के बीच की दूरी होगी कम
भारतीय शिक्षा बोर्ड की इस पहल से स्कूली शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम होने की उम्मीद है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलने से उनके कौशल में वृद्धि होगी और रोजगार के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी।
बोर्ड का मानना है कि स्कूल स्तर से ही कौशल आधारित शिक्षा शुरू होने पर युवा अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप रोजगार, स्वरोजगार तथा उद्यमिता के विकल्प चुन सकेंगे। इससे शिक्षा को अधिक उपयोगी और रोजगारोन्मुख बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।



