गोपेश्वर, 12 अगस्त। चमोली जिले के तमक गांव में आपदा ने भारी तबाही मचाई है। तमक नाले के उफान के साथ आए मलबे से कई मकानों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। सेब, आड़ू और अखरोट की फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। आपदा के बाद सहमे ग्रामीणों ने गांव को तत्काल सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की मांग की है।
मकानों और कृषि भूमि को भारी नुकसान
तमक नाले के समीप रहने वाले हुकम सिंह, दरमान सिंह और गब्बर सिंह के मकान आपदा की चपेट में आने से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा बलवंत सिंह, अजप सिंह, बुद्धि सिंह, शंकर सिंह, पदम सिंह, नंदन सिंह, हुकम सिंह, पार्वती देवी, श्यामा देवी और बिसन सिंह की कृषि भूमि और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
ग्रामीणों के अनुसार आपदा के कारण क्षेत्र में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। फसलों के नष्ट होने से प्रभावित परिवारों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। ग्रामीण अब तत्काल राहत के साथ गांव के सुरक्षित विस्थापन और स्थायी पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
संचार सेवाएं ठप, मुआवजे और पुनर्वास की मांग
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह बुटोला ने बताया कि आपदा के बाद गांव की संचार सेवाएं भी ठप हो गई हैं। इससे बाहरी क्षेत्रों में संपर्क करने और राहत से जुड़ी जानकारी हासिल करने में ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने के साथ गांव के लिए स्थायी और सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए केवल राहत कार्य पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित विस्थापन की कार्रवाई भी तत्काल शुरू की जानी चाहिए।
बीआरओ का जवान लापता, एसडीआरएफ का सर्च अभियान
आपदा के दौरान बीआरओ का एक जवान भी लापता हुआ है। उसका अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। लापता जवान की तलाश में एसडीआरएफ की टीम लाता-भलागांव क्षेत्र में लगातार सर्च अभियान चला रही है। दुर्गम परिस्थितियों के बीच जवान खोज एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
जिलाधिकारी ने प्रभावित क्षेत्र का लिया जायजा
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बुधवार को तमक गांव पहुंचकर प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया और ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने तथा पुनर्वास की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राहत के साथ-साथ सुरक्षित विस्थापन और पुनर्वास की कार्रवाई तत्काल शुरू किया जाना जरूरी है।



