ब्रिजटाउन, 18 जुलाई। विश्व क्रिकेट के महानतम ऑलराउंडरों में गिने जाने वाले वेस्टइंडीज के दिग्गज सर गैरी सोबर्स का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ क्रिकेट जगत ने एक ऐसे खिलाड़ी को खो दिया, जिसने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों विभागों में अपनी असाधारण प्रतिभा से खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके निधन की खबर के बाद दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे गैरी सोबर्स
साल 1936 में बारबाडोस में जन्मे गैरी सोबर्स ने बेहद कम उम्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। उन्होंने मात्र 16 वर्ष की आयु में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया और 1954 में वेस्टइंडीज की टेस्ट टीम का हिस्सा बने। शुरुआत में उन्हें मुख्य रूप से गेंदबाज के रूप में मौका मिला, लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी शानदार बल्लेबाजी और हरफनमौला प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अलग पहचान बना ली।
365 रन की ऐतिहासिक पारी से रचा इतिहास
साल 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई उनकी नाबाद 365 रन की पारी क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार प्रदर्शनों में गिनी जाती है। उस समय यह टेस्ट क्रिकेट की एक पारी का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था। उनका यह विश्व रिकॉर्ड 36 वर्षों तक कायम रहा, जिसे बाद में वेस्टइंडीज के ही महान बल्लेबाज ब्रायन लारा ने 1994 में तोड़ा। यह पारी आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे प्रेरणादायक उपलब्धियों में शामिल मानी जाती है।
छह गेंदों पर छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज
गैरी सोबर्स ने वर्ष 1968 में इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलते हुए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए उन्होंने ग्लेमोर्गन के खिलाफ एक ही ओवर की छहों गेंदों पर छह छक्के लगाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह कारनामा करने वाले वह दुनिया के पहले बल्लेबाज बने और इस उपलब्धि ने उन्हें खेल के इतिहास में अमर कर दिया।
बल्ले और गेंद दोनों से छोड़ी अमिट छाप
गैरी सोबर्स ने 1954 से 1974 के बीच वेस्टइंडीज के लिए 93 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 57.78 की शानदार औसत से 8,032 रन बनाए और 235 विकेट भी अपने नाम किए। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के साथ तेज-मध्यम गति, पारंपरिक स्पिन और रिस्ट स्पिन तीनों तरह की गेंदबाजी करने में सक्षम थे। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी उन्होंने 28 हजार से अधिक रन और एक हजार से ज्यादा विकेट लेकर अपनी असाधारण ऑलराउंड क्षमता का परिचय दिया।
क्रिकेट को दिए अविस्मरणीय योगदान
सर गैरी सोबर्स ने वेस्टइंडीज की कप्तानी भी संभाली और संन्यास के बाद कोच तथा मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। क्रिकेट में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें 1975 में ‘सर’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। वर्ष 2009 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के हॉल ऑफ फेम में भी शामिल किया गया। उनका करियर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और विश्व क्रिकेट उन्हें हमेशा सम्मान के साथ याद करेगा।


