नई दिल्ली, 20 अगस्त। कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। उन्हें 1984 सिख विरोधी दंगा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
सात साल से तिहाड़ जेल में बंद थे सज्जन कुमार
सज्जन कुमार को 27 अप्रैल 2022 को दंगों से जुड़े एक मामले में जमानत मिली थी, लेकिन दूसरे मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण वह जेल में ही रहे। वह करीब सात वर्षों से तिहाड़ जेल में बंद थे। इस वर्ष अप्रैल में उन्होंने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी थी, लेकिन अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था।
1984 दंगों से जुड़े मामलों में सजा
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2013 में निचली अदालत के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें सज्जन कुमार को बरी किया गया था। इससे पहले जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। इस हिंसा में दो लोगों की मौत हुई थी।
मामला दोबारा सामने आने के बाद एसआईटी ने फरवरी 2015 में सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर 1 नवंबर 1984 को जनकपुरी में सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से जुड़ी थी। दूसरी एफआईआर 2 नवंबर 1984 को सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाकर मारने की घटना से संबंधित थी।
जुलाई 2025 में दर्ज कराया था बयान
इन मामलों में 7 जुलाई 2025 को सज्जन कुमार ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने कहा था कि वह 1984 के सिख विरोधी दंगों में कभी शामिल नहीं रहे और उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उन्होंने जांच एजेंसी पर निष्पक्ष जांच नहीं करने का आरोप भी लगाया था।
सज्जन कुमार एक अन्य 1984 दंगा मामले में पहले से उम्रकैद की सजा काट रहे थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी क्षेत्र में पांच सिखों की हत्या तथा एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।



