हरिद्वार, २७ अगस्त। माँ माया देवी मंदिर और श्री आनंद भैरव मंदिर में गुरुवार को सनातन चेतना और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सिद्धपीठ में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देश-प्रदेश की उन्नति और विश्व शांति की प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने साधु-संतों से आशीर्वाद भी लिया।
संत सम्मेलन में वंदे मातरम से हुई शुरुआत
मंदिर परिसर में आयोजित ऐतिहासिक संत सम्मेलन की अध्यक्षता अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत रविंद्र पुरी महाराज ने की। सम्मेलन का संचालन जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक और अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्री महंत हरि गिरि महाराज ने किया।
सनातन परंपरा में नई पहल करते हुए सम्मेलन की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सामूहिक गान से की गई। यह पहल महंत हरि गिरि की प्रेरणा से हुई। महंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि इस संदेश को केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं रखा जाएगा। अखाड़ा परिषद का प्रयास रहेगा कि देशभर के अखाड़ों, आश्रमों, मठ-मंदिरों में होने वाले धार्मिक आयोजनों, यज्ञ और समारोह की शुरुआत वंदे मातरम से हो।
संतों ने राष्ट्र निर्माण में एकजुटता का दिया संदेश
संतों ने तीरथ सिंह रावत को आशीर्वाद देते हुए कहा कि राष्ट्र का विकास तभी संभव है, जब सनातन की स्थापना और वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ कार्य किया जाए। महंत हरि गिरि ने जातिवाद और भेदभाव छोड़कर राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत समाज इस उद्देश्य को लेकर देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाएगा।
उन्होंने उत्तराखंड में पलायन को बड़ी चुनौती बताते हुए सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तथा विश्वविद्यालय खोलने की मांग की। साथ ही वन नेशन, वन इलेक्शन का समर्थन करते हुए संत समाज की ओर से जन-जागरण अभियान चलाने की बात कही।
संतों की भूमिका अतुलनीय: तीरथ सिंह रावत
तीरथ सिंह रावत ने संतों का आभार जताते हुए कहा कि राष्ट्र, चरित्र और समाज निर्माण में संतों की भूमिका अतुलनीय है।
सम्मेलन में महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि, वीरेंद्रानंद गिरि, महंत प्रेम गिरि, महेश पुरी, मनोज गिरि सहित बड़ी संख्या में संत, नागा संन्यासी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।



