देहरादून, 26 अगस्त। उत्तराखंड सरकार की ओर से सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए गठित किए जा रहे अग्निवीर रोजगार सेल को राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व कर्नल अजय कोठियाल ने प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण और अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय पहल बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार सेवामुक्त अग्निवीरों के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य को लेकर गंभीर है।
अग्निवीर रोजगार सेल को कैबिनेट की मंजूरी
भाजपा मुख्यालय में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में अजय कोठियाल ने कहा कि कैबिनेट का अग्निवीर रोजगार सेल के गठन को मंजूरी देने का निर्णय सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां अग्निवीरों के लिए इस तरह के समर्पित रोजगार सेल के गठन की पहल की गई है।
कोठियाल ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 17 जुलाई को देहरादून के कुआंवाला में यूथ फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘युवा अग्निवीर संवाद’ कार्यक्रम में इस सेल के गठन की घोषणा की थी। करीब डेढ़ महीने के भीतर इसे कैबिनेट से मंजूरी मिलना सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।
छह पदों के सृजन को भी मिली मंजूरी
अजय कोठियाल के अनुसार, अग्निवीर रोजगार सेल के संचालन के लिए छह पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। इनमें उप निदेशक, सहायक निदेशक, कनिष्ठ सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर समेत अन्य पद शामिल हैं। यह सेल सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि अग्निवीर रोजगार सेल का मूल उद्देश्य सेना में चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद वापस लौटने वाले उत्तराखंड के अग्निवीरों को उनकी योग्यता, कौशल, सैन्य अनुभव और रुचि के अनुरूप रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
रोजगार देने वाली संस्थाओं से समन्वय करेगा सेल
कोठियाल ने बताया कि रोजगार सेल अग्निवीरों और रोजगार देने वाली संस्थाओं के बीच समन्वयक की भूमिका निभाएगा। इसके तहत केंद्र एवं राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी विभागों, अर्द्धसैनिक बलों और निजी क्षेत्र के साथ समन्वय स्थापित कर रोजगार की संभावनाएं तलाश की जाएंगी।
अग्निवीरों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, बैंकिंग प्रक्रियाओं को समझाने और स्वरोजगार शुरू करने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। रोजगार की जरूरत के अनुरूप अग्निवीरों को प्रशिक्षण दिलाने और कौशल विकास संस्थानों से जोड़ने पर भी काम होगा।
तैयार होगा अग्निवीरों के लिए डिजिटल पोर्टल
अजय कोठियाल ने बताया कि अग्निवीरों के लिए डिजिटल पोर्टल तैयार किया जाएगा। इसमें उनके कौशल, योग्यता और अनुभव का विवरण उपलब्ध होगा। इससे रोजगार से जुड़ी प्रक्रिया को एक ही स्थान पर संचालित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि ‘कौशल वीर योजना’, आईटीआई और संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि अग्निवीरों को रोजगार के लिए मान्य प्रमाणपत्र और आवश्यक प्रशिक्षण मिल सके।
सेना में चार वर्ष की सेवा के दौरान अग्निवीरों को प्राप्त अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, तकनीकी दक्षता और अन्य कौशल को नागरिक क्षेत्र के रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न विभागों और संस्थानों के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है। रोजगार के संभावित क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं के अलावा सार्वजनिक उपक्रम और निजी क्षेत्र भी शामिल हैं।
सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण
कोठियाल ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था कर चुकी है। इसके साथ रोजगार सेल अग्निवीरों को उपलब्ध अन्य रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास के अवसरों से जोड़ने का काम करेगा।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में समूह ‘ग’ के वर्दीधारी पदों की सीधी भर्ती में भी 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन होगा संचालन
अजय कोठियाल ने कहा कि रोजगार सेल के मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन काम करने से अग्निवीरों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने इसे ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ बताते हुए कहा कि रोजगार से जुड़ी विभिन्न सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
उन्होंने कहा कि यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सेना से लौटने वाले युवाओं के सैन्य अनुभव और कौशल को राज्य की अर्थव्यवस्था तथा निजी क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ने का प्रयास भी है।
कोठियाल ने कहा कि प्रयास है कि सेना के प्रति युवाओं का भरोसा कायम रहे, सैनिकों का हौसला बढ़े और भारतीय सेना को मजबूत बनाने में योगदान मिले। उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड से शुरू हुई यह पहल भविष्य में दूसरे राज्यों के लिए भी मॉडल बनेगी।
शहीद सैनिकों की स्मृति में मूर्तियां लगाने के निर्णय का स्वागत
अजय कोठियाल ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति में उनके पैतृक गांवों में मूर्तियां स्थापित किए जाने के सरकार के निर्णय का भी स्वागत किया।



