नई दिल्ली, 20 अगस्त। भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए अपने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया है। नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच गुरुवार को इस संबंध में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग का विस्तार करने, समुद्री सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने तथा रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
हिंद-प्रशांत में शांति और स्थिरता पर जोर
यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब भारत और जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्वतंत्र एवं निर्बाध वैध व्यापार को महत्वपूर्ण मानते हैं। जापान की सुरक्षा नीति में भी मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत की अवधारणा को प्रमुख स्थान दिया गया है।
बैठक की शुरुआत में राजनाथ सिंह ने जापानी रक्षा मंत्री का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत इस कठिन समय में आवश्यक किसी भी सहायता, राहत या सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत-जापान संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, परस्पर सम्मान और लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत संबंधों पर आधारित हैं। दोनों देश अगले वर्ष राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे।
समुद्री सुरक्षा को बताया रणनीतिक प्राथमिकता
राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत और जापान की मित्रता दोनों देशों के साथ-साथ व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, लचीलापन और नियम आधारित व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला बन गई है। एशिया के दो प्रमुख लोकतंत्रों के रूप में दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि वे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि भारत और जापान की समुद्री जीवनरेखाएं बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में नौवहन की स्वतंत्रता, हवाई क्षेत्र से निर्बाध आवाजाही और वैध व्यापार को बिना बाधा जारी रखना केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि रणनीतिक अनिवार्यता भी है।
रक्षा मंत्री ने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा को एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा बताया। उन्होंने भारत के ‘महासागर’ दृष्टिकोण और जापान की ‘मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत’ पहल के बीच बेहतर तालमेल को वर्तमान समय में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बताया। ‘महासागर’ का अर्थ क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति है।
रक्षा तकनीक और ‘मेक इन इंडिया’ पर चर्चा
राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के दृष्टिकोणों का समन्वय पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकता है। बैठक में रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
विशेष रूप से ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा उत्पादन, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने के अवसरों पर विचार किया गया। भारत और जापान पिछले कुछ वर्षों में अपने रक्षा सहयोग को सैन्य अभ्यासों और उच्चस्तरीय संवाद से आगे बढ़ाकर रक्षा उद्योग, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित कर रहे हैं।
वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच हुई तीसरी विदेश एवं रक्षा मंत्री स्तरीय 2+2 वार्ता में भी मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत तथा द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी थी।
शिंजिरो कोइजुमी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी श्रद्धांजलि
द्विपक्षीय वार्ता से पहले जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और पुष्पांजलि अर्पित की।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर उनकी श्रद्धांजलि भारत के वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के प्रति सम्मान का प्रतीक रही। इसके बाद दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें रक्षा और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।



