हरिद्वार, 08 अगस्त। श्रावण मास में शिवभक्ति और आस्था के बीच हरिद्वार के चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड से एक दंपति ने दूसरी बार कांवड़ यात्रा शुरू की। शहजाद से शंकर और रजिया से सावित्री बने इस दंपति ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ गंगा पूजन किया। इसके बाद दोनों अपनी जन्मभूमि बहेड़ी गुर्जर के लिए गंगाजल लेकर रवाना हुए। दंपति ने शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का गंगाजल से जलाभिषेक करने का संकल्प लिया है।
वैदिक विधि से गंगा पूजन के बाद शुरू हुई यात्रा
कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले दंपति ने तीर्थाचार्य संत राम विशाल दास महाराज से आशीर्वाद लिया। उनके मार्गदर्शन में पंडितों ने वैदिक रीति-रिवाज से गंगाजल का पूजन कराया। इस दौरान हितेश दास महाराज, महातार शास्त्री सहित कई संत-महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे।
गंगा पूजन के बाद दंपति ने बाबा हठयोगी महाराज का भी आशीर्वाद लिया और कांवड़ लेकर अपनी यात्रा शुरू की।
एक ही श्रावण में दूसरी बार उठाई कांवड़
इस यात्रा की खास बात यह है कि दंपति ने इसी श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ उठाई है। इससे पहले एक अगस्त को आयोजित कांवड़ यात्रा में दोनों ने हरिद्वार से गंगाजल लिया था। इसके बाद तीन अगस्त को गाजियाबाद पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था।
अब दोनों ने एक बार फिर हरिद्वार से कांवड़ उठाई है। उनका संकल्प है कि गंगाजल लेकर बहेड़ी गुर्जर पहुंचेंगे और शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।
संत ने कहा, आस्था और इच्छा से अपनाया मार्ग सम्मान योग्य
तीर्थाचार्य संत राम विशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म किसी व्यक्ति पर बलपूर्वक मत परिवर्तन का समर्थन नहीं करता। उनके अनुसार, जो व्यक्ति अपनी श्रद्धा, स्वतंत्र इच्छा और अपने पूर्वजों की संस्कृति के प्रति आस्था के आधार पर सनातन मार्ग अपनाता है, उसका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रावण मास में दंपति का अपनी जन्मभूमि के लिए गंगाजल लेकर जाना उनके धार्मिक संकल्प और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
शंकर बोले, दूसरी बार कांवड़ उठाना भावनात्मक अनुभव
शंकर, जिनका पूर्व नाम शहजाद बताया गया है, ने कहा कि सनातन धर्म में उन्हें पूजा-पद्धति, परंपराओं, संस्कारों और जीवन जीने की स्वतंत्रता का अनुभव हुआ है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ जल उठाना उनके लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है।
उन्होंने कहा कि वे अपने गांव बहेड़ी गुर्जर पहुंचकर शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। उनका कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जड़ों, परंपराओं और पूर्वजों से जुड़े इतिहास को समझने का प्रयास करना चाहिए।
कांवड़ यात्रा शुरू होने के अवसर पर संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने दंपति को मंगलमय यात्रा तथा भगवान शिव की कृपा के लिए शुभकामनाएं दीं।



