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पेपर लीक विधेयक पर चर्चा नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण, छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मुद्दा : किरेन रिजिजू

नई दिल्ली, 27 जुलाई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधनों पर रोक लगाने संबंधी विधेयक पर संसद में चर्चा नहीं हो पाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह विषय देश के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है और इस पर संसद में गंभीर तथा सार्थक बहस होनी चाहिए।

संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रिजिजू ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों और देशभर में उठी मांगों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है। उनका कहना था कि यदि इतने महत्वपूर्ण विषय पर भी संसद में चर्चा नहीं हो पाती है तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल लगातार नारेबाजी, काले कार्ड दिखाने तथा अन्य तरीकों से सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं, जिसके कारण इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा संभव नहीं हो पा रही है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह छात्रों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने दे और विधेयक पर सकारात्मक चर्चा में भाग ले।

रिजिजू ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विचार-विमर्श होना चाहिए। परीक्षा प्रणाली में सुधार, प्रश्नपत्र लीक पर रोक और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा देशहित में आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए बड़ा निर्णय लिया है। इसी दिशा में परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन भी किया गया है, जो परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उपाय सुझाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में प्रश्नपत्र लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कड़े एवं समयबद्ध प्रावधान किए गए हैं। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान भी रखा गया है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और विद्यार्थियों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत हो।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और इस महत्वपूर्ण विधेयक पर गंभीर, रचनात्मक तथा सकारात्मक चर्चा सुनिश्चित करें।

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