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परमार्थ निकेतन में वेदान्त योग कोर्स का शुभारंभ, साधकों ने पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

ऋषिकेश, 21 जुलाई। परमार्थ निकेतन में मंगलवार से वेदान्त योग कोर्स का शुभारंभ हुआ। देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों से पहुंचे योग, ध्यान और अध्यात्म के जिज्ञासुओं ने कोर्स में भाग लेते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने की दिशा में अपनी यात्रा शुरू की। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया। आयोजन का उद्देश्य योग और वेदान्त के माध्यम से संतुलित जीवनशैली, आध्यात्मिक चेतना तथा प्रकृति संरक्षण का संदेश देना रहा।

वेदान्त और योग आत्मबोध का मार्ग

परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि वेदान्त मनुष्य को उसकी आंतरिक चेतना का बोध कराता है, जबकि योग स्वयं के भीतर की यात्रा का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल तनाव प्रबंधन ही नहीं, बल्कि आत्म-प्रबंधन की आवश्यकता अधिक है।

उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और जीवनशैली में संतुलन स्थापित कर लेता है तो तनाव स्वतः कम होने लगता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं।

योग को जीवनशैली बनाने का संदेश

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास या व्यायाम तक सीमित नहीं है। इसे जीवन के प्रत्येक विचार, व्यवहार और कर्म में उतारना ही वास्तविक योग है। उनके अनुसार सच्चा योग वही है, जिसमें शांति, करुणा, अनुशासन, सेवा और मानवता के प्रति समर्पण का भाव समाहित हो।

उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि योग को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाकर स्वस्थ, संतुलित और जागरूक समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

पौधारोपण कर लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान सभी साधकों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि एक पौधा लगाना केवल प्रकृति की सेवा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।

उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के जीवन चक्र का महत्वपूर्ण आधार हैं। पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण का भी संकल्प लेना चाहिए।

भारतीय दर्शन और संतुलित जीवन का मिलेगा प्रशिक्षण

योगाचार्य गायत्री ने बताया कि कोर्स के दौरान प्रतिभागियों को योग विज्ञान, ध्यान, भारतीय दर्शन, वेदान्त, आध्यात्मिक जीवन और संतुलित दिनचर्या से जुड़े विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि भारत के साथ-साथ अनेक देशों से आए प्रतिभागी भारतीय संस्कृति, वेदान्त और अध्यात्म को गहराई से समझने के लिए उत्साहित हैं। यह कोर्स उन्हें योग के व्यावहारिक और आध्यात्मिक दोनों पक्षों से परिचित कराएगा।

परमार्थ निकेतन में आयोजित यह वेदान्त योग कोर्स न केवल आध्यात्मिक ज्ञान का माध्यम बनेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सकारात्मक जीवनशैली और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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