नई दिल्ली, 19 जुलाई। अभिनेता रणदीप हुड्डा ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अभिनेता के रूप में पहचान बनाने के बाद निर्देशन के क्षेत्र में यह उनकी पहली फिल्म थी, जिसे देश के सर्वोच्च फिल्म सम्मान से नवाजा गया। फिल्म में उन्होंने निर्देशन के साथ मुख्य भूमिका और सह-लेखन की जिम्मेदारी भी निभाई।
‘यह सम्मान शब्दों से परे’
राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर रणदीप हुड्डा ने इसे अपने जीवन का सबसे भावुक और अविस्मरणीय क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह फिल्म उनके लिए केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि फिल्म निर्माण के दौरान अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन पूरी टीम ने धैर्य और समर्पण के साथ काम किया।
रणदीप ने कहा कि वीर सावरकर जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व की कहानी को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर प्रस्तुत करना उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। उनके अनुसार फिल्म निर्माण के दौरान आई कठिनाइयां वीर सावरकर के संघर्ष और बलिदानों के सामने बहुत छोटी थीं।
अभिनय, निर्देशन और लेखन का सफल संगम
‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ रणदीप हुड्डा के करियर की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में शामिल रही। उन्होंने फिल्म में अभिनय के साथ निर्देशन और सह-लेखन की जिम्मेदारी भी निभाई। वीर सावरकर के किरदार को जीवंत बनाने के लिए उन्होंने उल्लेखनीय शारीरिक परिवर्तन किया, जिसकी दर्शकों और समीक्षकों ने सराहना की थी।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने के बाद रणदीप ने अपनी पूरी टीम और फिल्म से जुड़े सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फिल्म नई पीढ़ी को वीर सावरकर के जीवन, विचारों और देश के प्रति उनके योगदान को समझने की प्रेरणा देगी।
इस सम्मान के साथ रणदीप हुड्डा ने अभिनेता के साथ-साथ निर्देशक के रूप में भी अपनी अलग पहचान स्थापित कर ली है।


