लंदन, 27 जुलाई। ब्रिटेन की नई सरकार में भारतीय मूल के कनिष्क नारायण को देश का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मंत्री नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति न केवल ब्रिटेन की तकनीकी नीतियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि भारतीय मूल के लोगों के लिए भी गौरव का विषय बन गई है। बिहार के मुजफ्फरपुर से ताल्लुक रखने वाले कनिष्क नारायण की इस उपलब्धि की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।
मुजफ्फरपुर से ब्रिटेन की कैबिनेट तक का सफर
कनिष्क नारायण का मूल निवास बिहार के मुजफ्फरपुर में है। वह लगभग 12 वर्ष की आयु में अपने परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए थे। वहां उन्होंने प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा, तकनीकी समझ और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका के कारण उन्होंने ब्रिटिश राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
ऐतिहासिक चुनावी जीत से बढ़ा राजनीतिक कद
वर्ष 2024 के आम चुनाव में कनिष्क नारायण ने वेले ऑफ ग्लैमोरगन संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया। इस जीत के साथ वह वेल्स क्षेत्र से निर्वाचित होने वाले पहले जातीय अल्पसंख्यक सांसद बने। उनकी यह उपलब्धि ब्रिटेन की समावेशी राजनीति का भी महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।
तकनीकी नीतियों की जिम्मेदारी संभालेंगे
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंत्री के रूप में कनिष्क नारायण ब्रिटेन की उभरती तकनीकी रणनीतियों, नवाचार, डिजिटल विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े नियामकीय ढांचे को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नियुक्ति से ब्रिटेन की तकनीकी प्रतिस्पर्धा को नई दिशा मिल सकती है।
भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती भागीदारी ने ब्रिटेन की राजनीति में विविधता और प्रतिनिधित्व को और मजबूत किया है। कनिष्क नारायण की नियुक्ति को इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।


