नई टिहरी, 18 सितंबर। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण के साथ अब उनके समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खेल, कला और रचनात्मक गतिविधियों को सीखने का माध्यम बनाकर नौनिहालों की बुनियादी समझ और सीखने की प्रक्रिया को सहज एवं रोचक बनाया जा रहा है।
सेमिनार में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साझा किए अनुभव
बाल विकास परियोजना कार्यालय कीर्तिनगर और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सेमिनार में 10 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने केंद्रों पर बच्चों के सीखने और समझने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए अपनाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की प्रस्तुति दी।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि खेल और रचनात्मकता को शिक्षा का माध्यम बनाने से बच्चे सहजता के साथ नई चीजें सीख रहे हैं। इस दौरान क्राफ्ट, चित्रकला, भावगीत, कविता और खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अलग-अलग विषयों की जानकारी देने के प्रयासों को वीडियो प्रस्तुतियों के जरिए साझा किया गया।
खेल के जरिए रंग, आकार और संख्या ज्ञान की समझ
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को रंगों, आकारों और आकृतियों की पहचान के साथ संख्या ज्ञान विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां कराई जा रही हैं। इसके अलावा स्वच्छता की आदतें विकसित करने और अलग-अलग जानवरों की पहचान कराने जैसे विषयों को भी खेल एवं रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा गया है।
सेमिनार में यह संदेश दिया गया कि जब शिक्षा बच्चों के लिए बोझ न होकर खेल का रूप ले लेती है, तो उनमें सीखने की स्वाभाविक रुचि और ललक विकसित होती है। गतिविधि आधारित सीखने से बच्चों को नई अवधारणाओं को समझने का अवसर सहज तरीके से मिल रहा है।
प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में विभाग की ओर से प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डीपीओ संजय गौरव, बाल विकास परियोजना अधिकारी नीतू बधानी, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के जिला समन्वयक प्रमोद पैन्यूली, सुपरवाइजर मंजू जोशी, ललिता धनाई, प्रिंसा नेगी और सुमित्रा सरियाल मौजूद रहीं।
सेमिनार में अर्चना, प्रीति, सविता, विजयलक्ष्मी, मनोरमा और रजनी ने प्रस्तुतियां दीं।


