हरिद्वार, 10 अगस्त। धर्मनगरी हरिद्वार के ऑटो चालक सुशील कुमार के बेटे डॉ. प्रियंक ने कठिन परिश्रम और संघर्ष के दम पर आईआईटी दिल्ली से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है। दुनिया के 118वें सर्वश्रेष्ठ संस्थान आईआईटी दिल्ली से पीएचडी हासिल कर उन्होंने अपने माता-पिता और शहर का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है।
आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में मिली डॉक्टरेट की उपाधि
8 अगस्त 2026 को आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में डॉ. प्रियंक को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। वर्तमान में प्रियंक रिसर्च एसोसिएट के पद पर कार्यरत हैं।
प्रियंक की यह सफलता उनके परिवार के संघर्ष और मेहनत की कहानी भी है। उनके पिता सुशील कुमार ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं आने दी। बेटे को डॉक्टरेट की उपाधि मिलने के अवसर पर माता श्रीमती संतोष और पिता की आंखें गर्व से भर आईं।
परिवार और गुरु को दिया सफलता का श्रेय
डॉ. प्रियंक ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ पत्नी प्रियंका, बेटे माधव, भाई पुलकित व अंकित और बहन कुनिका को दिया। उन्होंने आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर अशोक एन. भास्करवार के निर्देशन में उच्च दाब वाले कोलाइडल हाइड्रोजन सूक्ष्मकणों पर शोध किया।
डॉक्टरेट के दौरान प्रियंक को दो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में ‘सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार’ भी प्राप्त हुए। यह उपलब्धि उनके शोध कार्य की महत्वपूर्ण पहचान बनी।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने प्रियंक
झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि हासिल करने के बाद प्रियंक ने आईआईटी दिल्ली से डॉक्टरेट तक का सफर तय किया। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की, वह युवाओं के लिए प्रेरणा बनी है।
ऑटो चालक के बेटे से आईआईटी दिल्ली से डॉक्टरेट हासिल करने तक का उनका सफर परिवार के संघर्ष, मेहनत और निरंतर प्रयास को दर्शाता है।



