देहरादून, 07 अगस्त। मुख्यमंत्री धामी ने मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद की ओर से आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिच्छू घास से निर्मित पारंपरिक वस्त्र खरीदकर स्थानीय उत्पादों और शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित भी किया।
हथकरघा और हस्तशिल्प उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस देश के उन समर्पित बुनकरों और शिल्पकारों के सम्मान का प्रतीक है, जो अपनी कला, मेहनत और कौशल के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कारीगर केवल वस्त्र और हस्तशिल्प उत्पाद तैयार नहीं करते, बल्कि उनके उत्पादों में प्रदेश की संस्कृति, लोकजीवन और पारंपरिक विरासत की आत्मा भी समाहित होती है।
हर्षिल की शॉल से रिंगाल और बिच्छू घास तक खास पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की बुनाई और हस्तशिल्प परंपरा अपनी विशिष्टता, गुणवत्ता और विविधता के कारण देश-विदेश में पहचान बना रही है। हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी और धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प और बिच्छू घास से तैयार उत्पाद राज्य की समृद्ध लोक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़कर स्थानीय कारीगरों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
‘वोकल फॉर लोकल’ से स्थानीय उत्पादों को मिल रही नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे अभियानों से देश के स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को नई पहचान मिली है। उत्तराखंड सरकार भी हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को मजबूत, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अब तक 278 बुनकरों और शिल्पियों को चार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण तथा एक करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी जा चुकी है। इससे करीब 834 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।
आधुनिक सुविधाओं और प्रशिक्षण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के माध्यम से बुनकरों और शिल्पकारों को आधुनिक मशीनें, बेहतर डिजाइन, प्रशिक्षण, साझा सुविधा केंद्र और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के बुनकरों को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने, वरिष्ठ शिल्पकारों को शिल्पकार पेंशन योजना के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा देने तथा उत्कृष्ट कारीगरों को ‘उत्तराखंड राज्य शिल्प रत्न’ सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
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ई-कॉमर्स के जरिए देश-विदेश तक पहुंचेंगे उत्तराखंड के उत्पाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-कॉमर्स मंचों, मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्तराखंड के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के कई पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक पहचान मिलने से उत्तराखंड की ब्रांड पहचान और मजबूत हुई है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी कोई वस्तु खरीदी जाए, तो उसके स्थानीय विकल्प पर जरूर विचार किया जाना चाहिए। स्थानीय उत्पादों की खरीद से सीधे प्रदेश के बुनकरों, शिल्पकारों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
समारोह में कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, विधायक सविता कपूर, सचिव विनय शंकर पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में बुनकर, हस्तशिल्पी, उद्यमी और महिला शिल्पकार मौजूद रहे।



