कांतिलाल मांडोत
नई दिल्ली: भारत तेजी से उस औद्योगिक दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां देश की आर्थिक शक्ति केवल पारंपरिक उद्योगों पर निर्भर नहीं रहेगी। अत्याधुनिक तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण भी आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण आधार बन रहे हैं। इसी बदलाव में सेमीकंडक्टर उद्योग की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। दुनिया भर में चिप निर्माण और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बीच भारत ने इस उद्योग को किसी एक शहर या राज्य तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग राज्यों में इसकी पूरी श्रृंखला विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
यह प्रयास विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और तकनीकी कदम माना जा सकता है। भारत का लक्ष्य चिप निर्माण के साथ-साथ डिजाइन, परीक्षण, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़ी क्षमताओं को भी देश में विकसित करना है।
आधुनिक तकनीक की बुनियाद है सेमीकंडक्टर उद्योग
सेमीकंडक्टर आज लगभग हर आधुनिक तकनीक की बुनियाद बन चुका है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, वाहन, चिकित्सा उपकरण, अंतरिक्ष तकनीक, रक्षा प्रणालियां, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में चिप का इस्तेमाल होता है।
इसी कारण जिस देश के पास चिप निर्माण, डिजाइन, परीक्षण और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की मजबूत क्षमता होगी, उसकी तकनीकी और आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। भारत इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य श्रृंखला को देश में विकसित करने की कोशिश कर रहा है।
इसका उद्देश्य केवल बड़ी निर्माण इकाइयां स्थापित करना नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े विभिन्न उद्योगों और तकनीकी क्षमताओं का आधार तैयार करना भी है।
गुजरात बन रहा सेमीकंडक्टर का प्रमुख केंद्र
इस दिशा में गुजरात सबसे महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी फैब परियोजना के साथ राज्य में सेमीकंडक्टर निर्माण का मजबूत आधार तैयार हो रहा है।
इसके अलावा साणंद में माइक्रोन की पैकेजिंग और परीक्षण सुविधा, सीजी पावर और रेनेसास की इकाई तथा कायन्स सेमीकॉन की सुविधा ने राज्य में इस क्षेत्र का दायरा और व्यापक किया है।
गुजरात की विशेषता केवल चिप निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। राज्य में उद्योगों के लिए जरूरी बिजली, पानी, गैस, जमीन, परिवहन और बंदरगाह जैसी सुविधाओं का मजबूत ढांचा मौजूद है। इससे भविष्य में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी छोटी-बड़ी इकाइयों और सहायक उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो सकता है।
कर्नाटक में डिजाइन और तकनीकी क्षमता का आधार
कर्नाटक ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी अलग विशेषज्ञता विकसित की है। बेंगलूरु लंबे समय से सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप डिजाइन से जुड़ी प्रतिभाओं का प्रमुख केंद्र रहा है।
राज्य में अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण और तकनीकी विकास से जुड़ी क्षमताएं पहले से मौजूद हैं। उन्नत सेमीकंडक्टर प्रयोगशालाओं और परीक्षण सुविधाओं के विस्तार से भारत के चिप उद्योग को डिजाइन से लेकर गुणवत्ता परीक्षण तक आवश्यक तकनीकी आधार मिलने की उम्मीद है।
इसका लाभ नई तकनीकी प्रतिभाओं और रोजगार के अवसरों को भी मिल सकता है। सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार के साथ उच्च तकनीकी कौशल की मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण का महत्व भी बढ़ेगा।
तमिलनाडु और असम की भी बढ़ रही भूमिका
तमिलनाडु इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण के मजबूत आधार के कारण सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य में पहले से मौजूद इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का ढांचा, कुशल मानव संसाधन और औद्योगिक वातावरण नई परियोजनाओं के लिए आधार तैयार कर रहे हैं।
दूसरी ओर, असम ने भी सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे यह संकेत मिलता है कि देश में चिप उद्योग का विकास केवल पश्चिमी और दक्षिणी औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहने वाला है। पूर्वोत्तर भारत भी इस नई औद्योगिक श्रृंखला का हिस्सा बन सकता है।
यह विस्तार भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े औद्योगिक विकास को व्यापक भौगोलिक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
राजस्थान में भी सेमीकंडक्टर क्षेत्र ने पकड़ी रफ्तार
राजस्थान में भी इस दिशा में शुरुआत हो चुकी है। भिवाड़ी में सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और परीक्षण से जुड़ी सुविधा स्थापित हुई है। राज्य ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए अलग नीति बनाकर इस उद्योग को आकर्षित करने के प्रयास तेज किए हैं।
जोधपुर, पाली और मारवाड़ तथा कांकाणी जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की योजनाएं इस बात का संकेत हैं कि राजस्थान भी इस उभरते उद्योग में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है।
हालांकि, राज्य के सामने चुनौती एक-दो इकाइयों से आगे बढ़कर डिजाइन, पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़ी पूरी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की है।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए भी अवसर
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए सेमीकंडक्टर उद्योग नई औद्योगिक संभावनाएं पैदा कर सकता है। यह उद्योग केवल बड़ी फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ उपकरण निर्माण, विशेष सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक घटक, पैकेजिंग, परीक्षण, परिवहन, भंडारण और तकनीकी सेवाओं से जुड़े अनेक उद्योग विकसित होते हैं।
यदि अलग-अलग राज्य अपनी स्थानीय औद्योगिक क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करें, तो देश में एक व्यापक और परस्पर जुड़ी हुई सेमीकंडक्टर श्रृंखला तैयार हो सकती है।
इससे उद्योग के विभिन्न चरण अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित होने के साथ एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।
आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण कदम
भारत के लिए सेमीकंडक्टर उद्योग का सबसे बड़ा महत्व आत्मनिर्भरता से जुड़ा है। दुनिया में आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह का व्यवधान इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उद्योगों को प्रभावित कर सकता है।
घरेलू स्तर पर चिप निर्माण और उससे जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होने से भारत की बाहरी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में बनने वाले मोबाइल फोन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और रक्षा प्रणालियों के लिए जरूरी तकनीकी घटकों की उपलब्धता मजबूत हो सकती है।
इस दृष्टि से चिप निर्माण की घरेलू क्षमता भारत की औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकती है।
रोजगार और कौशल विकास को मिलेगा आधार
सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष रोजगार और कौशल विकास है। इस क्षेत्र में उच्च तकनीकी विशेषज्ञों के साथ बड़ी संख्या में प्रशिक्षित तकनीशियनों, इंजीनियरों और सहायक कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
अलग-अलग राज्यों में इकाइयां स्थापित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके साथ विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाकर नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक के लिए तैयार किया जा सकता है।
इस तरह सेमीकंडक्टर उद्योग केवल विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी कौशल के विकास में भी भूमिका निभा सकता है।
राज्यों में औद्योगिक विकास का होगा विस्तार
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का राज्यों में फैलाव औद्योगिक विकास के विकेंद्रीकरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। किसी एक स्थान पर पूरा उद्योग केंद्रित होने के बजाय अलग-अलग राज्य चिप निर्माण, डिजाइन, परीक्षण, पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता विकसित कर सकते हैं।
इससे राज्यों के बीच स्वस्थ औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। अलग-अलग क्षेत्रों की विशेषज्ञता एक व्यापक राष्ट्रीय औद्योगिक श्रृंखला का आधार बन सकती है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 से सामने आएगा बदलता परिदृश्य
17 से 19 सितंबर तक दिल्ली में होने वाला सेमीकॉन इंडिया 2026 इस बदलते औद्योगिक परिदृश्य को सामने रखने का एक महत्वपूर्ण मंच है। भारत जिस तरह से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश, तकनीक, प्रतिभा और औद्योगिक ढांचे को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रहा है, उससे आने वाले वर्षों में देश की तकनीकी क्षमता को नई दिशा मिल सकती है।
एक समय भारत को चिप और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए बड़ी मात्रा में विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब देश उसी क्षेत्र में अपनी क्षमता विकसित करने की तैयारी कर रहा है।
गुजरात में निर्माण और पैकेजिंग, कर्नाटक में डिजाइन और परीक्षण, तमिलनाडु में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, राजस्थान में नई इकाइयों की शुरुआत और अन्य राज्यों में बन रहा औद्योगिक आधार मिलकर एक बड़े राष्ट्रीय प्रयास का रूप ले रहे हैं।
यह केवल सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से सक्षम, औद्योगिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ता कदम है। विकसित भारत की यात्रा में एक छोटी सी चिप भविष्य की बड़ी औद्योगिक शक्ति का आधार बन सकती है।

