नई दिल्ली, 13 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन पहुंचे विभिन्न देशों के नेताओं का स्वागत किया। सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कई देशों के नेताओं की भागीदारी
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन भारत मंडपम पहुंचने वाले प्रमुख नेताओं में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा, बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्टे नदायिशिमिये, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद शामिल रहे।
रविवार को ब्रिक्स और आउटरीच देशों के नेता एक खुले सत्र में हिस्सा लेंगे। इस दौरान इस वर्ष की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना’ के प्रमुख स्तंभों पर चर्चा की जाएगी।
नेता आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे और सदस्य देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाया
इससे पहले शनिवार को ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाया। घोषणा-पत्र में भारत की अध्यक्षता की सराहना की गई और कहा गया कि उसने अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा एकजुटता को मजबूत करने के लिए नई ऊर्जा और गति प्रदान की है।
घोषणा-पत्र में भारत द्वारा 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच और ब्रिक्स प्लस संवाद सत्र की मेजबानी की भी सराहना की गई।
‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण’ विषय पर आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल नेताओं ने ब्रिक्स की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसमें आपसी सम्मान, समझ, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन, समावेशिता, सहयोग और सर्वसम्मति जैसे सिद्धांत शामिल हैं।
संयुक्त बयान पर सहमति बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस सम्मेलन के पहले ही दिन ब्रिक्स देशों द्वारा संयुक्त बयान पर सहमति बनना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना गया। इसकी वजह यह है कि सदस्य देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अलग-अलग और कभी-कभी विरोधी विचार मौजूद हैं।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कहा गया कि ब्रिक्स के दो दशकों की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए सदस्य देशों ने तीन प्रमुख स्तंभों के तहत सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। इनमें राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच सहयोग शामिल हैं।
शांति और समावेशी विकास पर जोर
घोषणा-पत्र में शांति को बढ़ावा देने, अधिक प्रतिनिधित्व वाली और अधिक न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने तथा एक बेहतर बहुपक्षीय प्रणाली को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
इसके साथ ही सतत विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। सदस्य देशों ने इन लक्ष्यों के माध्यम से अपने लोगों के लाभ के लिए सहयोग को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में भव्य रात्रिभोज
शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में भव्य रात्रिभोज का आयोजन किया। इसमें कई देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस अवसर पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक घेब्रेयेसस सहित कई गणमान्य अतिथि पहुंचे।
शाम का विशेष आकर्षण पूरी तरह पौधों पर आधारित विशेष वीगन गाला डिनर रहा। इस मेन्यू में भारत की विविध खानपान परंपराओं को प्रदर्शित करने के साथ पर्यावरण संरक्षण, समावेशिता और जिम्मेदार मेहमाननवाजी के सिद्धांतों को भी दर्शाया गया।



