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हरिद्वार में श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया गया रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म में गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़

हरिद्वार, 28 अगस्त। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को धर्मनगरी हरिद्वार में रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म श्रद्धा एवं धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया गया। हरकी पैड़ी समेत विभिन्न गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना की और मंदिरों में दर्शन किए।

गंगा घाटों पर संपन्न हुआ श्रावणी उपाकर्म

ब्राह्मण समाज की ओर से विभिन्न आश्रमों और गंगा तटों पर विधि-विधान के साथ श्रावणी उपाकर्म संपन्न कराया गया। इस दौरान पंचगव्य से शुद्धिकरण, ऋषि पूजन, तर्पण, यज्ञोपवीत परिवर्तन और वेद पाठ सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए गए।

नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म आत्मशुद्धि, स्वाध्याय और ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण संस्कार है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर वेदाध्ययन का संकल्प भी लिया जाता है।

भाई-बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन

हरिद्वार में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ घरों में भी रक्षाबंधन को लेकर उत्साह रहा। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुख-समृद्धि, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना की। भाइयों ने भी बहनों की रक्षा, सम्मान और सहयोग का संकल्प लिया।

रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में भी सुबह से चहल-पहल देखने को मिली। राखी, मिठाई और उपहारों की दुकानों पर लोगों की भीड़ रही। पर्व को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल बना रहा।

एक दिन में दिखा धार्मिक परंपराओं का संगम

पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा के साथ रक्षाबंधन मनाया गया। पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे तक रही। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और पारिवारिक संबंधों का प्रतीक है, जबकि श्रावणी उपाकर्म वैदिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।

दोनों पर्व एक ही दिन पड़ने के कारण हरिद्वार में धार्मिक और सामाजिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। गंगा स्नान, पूजा-अर्चना, वैदिक अनुष्ठानों और रक्षाबंधन के पारिवारिक उत्सव ने धर्मनगरी के वातावरण को श्रद्धा और उल्लास से भर दिया।

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