नई दिल्ली, 27 अगस्त। नेपाल के तीन जिलों में भोटेकोसी नदी में आई अचानक बाढ़ से हुई भारी तबाही के बाद भारत की ओर से राहत और बचाव प्रयासों में लगातार सहायता दी जा रही है। नेपाल में जल आपदा के बीच भारत ने राहत सामग्री भेजने का अभियान जारी रखते हुए गुरुवार को मानवीय सहायता की दूसरी खेप रवाना की।
नेपाल के लिए 37.5 टन राहत सामग्री रवाना
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि बुधवार को 10 टन मानवीय सहायता की पहली खेप भेजे जाने के बाद गुरुवार को भारत ने 37.5 टन सहायता की दूसरी खेप नेपाल के लिए रवाना की है।
जयशंकर ने बताया कि दूसरी उड़ान में 37.5 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री, दवाइयां तथा खाद्य पैकेट भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार और करीबी संपर्क में है और राहत एवं बचाव कार्यों में हर संभव सहयोग जारी रखा जाएगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी बताया कि 37.5 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री लेकर दूसरी उड़ान नेपाल के लिए रवाना हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और जारी राहत प्रयासों को पूरा समर्थन देता रहेगा।
बुधवार को भेजी गई थी 10 टन सहायता
इससे पहले बुधवार को भारत ने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों में सहायता के लिए 10 टन मानवीय राहत सामग्री भेजी थी। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह सामग्री औपचारिक रूप से नेपाल के संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपी थी।
इस सहायता में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए जरूरी राहत सामग्री शामिल थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत कठिन समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही
जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह तक भोटेकोसी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ में बह गए 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे। पुलिस के मुताबिक, ये शव भोटेकोसी और त्रिशूल नदी प्रणालियों के निचले इलाकों में स्थित कई जिलों में नदी के किनारे से बरामद किए गए।
इन जिलों में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम शामिल हैं।
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हिमस्खलन से रुका सहायक नदी का प्रवाह
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह बाढ़ भोटेकोसी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे का प्रवाह हिमस्खलन के कारण रुकने के बाद आई। इसके बाद नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे गांव सबसे पहले प्रभावित हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, उस समय इलाके में बारिश नहीं हुई थी। इसलिए लोगों को अचानक आने वाली इस आपदा का कोई अंदाजा नहीं था। बाढ़ आने के समय लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में व्यस्त थे।
नेपाल में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं, वहीं भारत की ओर से मानवीय सहायता भेजने का सिलसिला भी लगातार जारी है।



