भोपाल, 22 अगस्त। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए देशभर से 48 शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें मध्य प्रदेश के दो शिक्षकों को भी स्थान मिला है। भोपाल स्थित महात्मा गांधी शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला और सीधी के शैलेंद्र प्रताप सिंह इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुने गए हैं।
डॉ. अर्चना शुक्ला ने जताई खुशी
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन पर डॉ. अर्चना शुक्ला ने इसे भगवान की कृपा और अपने विद्यार्थियों के भरोसे का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें शाम करीब पांच से साढ़े पांच बजे के बीच फोन आया और ईमेल देखने के लिए कहा गया। ईमेल देखने के बाद उन्हें पुरस्कार के बारे में जानकारी मिली।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं, मध्य प्रदेश के शिक्षकों और उनके विद्यार्थियों का है, जिन्होंने हमेशा उन पर भरोसा किया है।
शिक्षिकाओं के संघर्षों का भी किया जिक्र
डॉ. अर्चना शुक्ला ने कहा कि शिक्षिकाओं के सामने पारिवारिक संघर्ष भी होते हैं। इन चुनौतियों को पार करते हुए जब कोई इस स्तर तक पहुंचता है, तो इससे यह संदेश जाता है कि यदि वह ऐसा कर सकती हैं तो दूसरी महिलाएं भी आगे बढ़ सकती हैं।
उन्होंने शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान को सराहनीय बताया। उनके अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बताया अहम
डॉ. अर्चना शुक्ला ने बताया कि उनके विद्यालय में कई राज्यों से, खासकर श्रमिक वर्ग से विद्यार्थी आते हैं। ये विद्यार्थी अपने साथ कई तरह के संघर्ष लेकर आते हैं। उन्होंने पिछले वर्ष की एक छात्रा का उदाहरण देते हुए बताया कि वह राष्ट्रपति से मिलने में सफल रही थी। वह प्रथम पीढ़ी की शिक्षार्थी है और उसके माता-पिता ने पहले पढ़ाई नहीं की थी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित करने से वे लगातार आगे बढ़ते रहते हैं। उन्होंने इस अवसर के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद भी किया।
शिक्षकों के लिए जीवनभर का सम्मान
डॉ. अर्चना शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार किसी भी शिक्षक के लिए सपने जैसा होता है। उन्होंने इसे देश के शिक्षकों के लिए सबसे बड़ा सम्मान और जीवनभर की उपलब्धि बताया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मान के बाद लोग उनके विद्यालय को जानेंगे और यह उपलब्धि देशभर के शिक्षकों के लिए प्रेरणा बनेगी।



