मसूरी, 20 अगस्त। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी में प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले अधिकारी प्रशिक्षुओं को बधाई दी। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्रसेवा को समर्पित सेवाकाल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अकादमी में प्रशिक्षण का एक अध्याय पूरा हुआ है, जबकि राष्ट्रसेवा की वास्तविक और महत्वपूर्ण यात्रा अब शुरू हो रही है।
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विवेकपूर्ण निर्णय जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि प्रशासन की वास्तविक परीक्षा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में होती है, जब समय सीमित हो, जानकारी अधूरी हो और किसी निर्णय का प्रभाव व्यापक हो सकता है। ऐसी स्थिति में नियम मार्गदर्शन करते हैं और अनुभव मदद करता है, लेकिन सही निर्णय लेने के लिए विवेक, निष्पक्षता और दूरदृष्टि आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि भारत परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए अधिकारियों को नीतियों के साथ-साथ जमीनी वास्तविकताओं और नागरिकों की आकांक्षाओं को भी समझना होगा। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से भारत को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि गांवों, कस्बों, शहरों और सामान्य नागरिकों के जीवन में देखने का आह्वान किया।
जनता की बात सुनना प्रशासन का पहला धर्म
राज्यपाल ने कहा कि फाइलें तथ्य उपलब्ध कराती हैं, लेकिन फील्ड वास्तविकता से परिचित कराता है। इसलिए अधिकारियों को लोगों के बीच जाकर उनकी बात सुननी और उनकी कठिनाइयों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का पहला धर्म जनता की बात सुनना और उसके विश्वास को बनाए रखना है।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को अपने सेवाकाल में हर परिस्थिति में राष्ट्र को सर्वोपरि रखने की भावना बनाए रखने की सीख दी। उनके अनुसार यही भावना अधिकारियों को पद से ऊपर उठाकर सच्चा राष्ट्रसेवक बनाती है।
एआई और नई तकनीक अपनाने पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस और नई तकनीक प्रशासन की कार्यक्षमता तथा निर्णय लेने की क्षमता को नई शक्ति प्रदान कर रही हैं। ऐसे में अधिकारियों को इन तकनीकों को सीखने और अपनाने के साथ स्वयं को लगातार अद्यतन रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि एलबीएसएनएए से निकलते समय अधिकारी प्रशिक्षु केवल सक्षम प्रशासक ही नहीं, बल्कि ऐसे राष्ट्रसेवक बनें जिनकी कार्यशैली में पारदर्शिता, व्यवहार में संवेदना, निर्णयों में दृढ़ता और हृदय में सदैव ‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव हो।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, एलबीएसएनएए के निदेशक डॉ. बी. राजेंदर और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



