देहरादून, 20 अगस्त। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच दो दिवसीय 14वीं संयुक्त कार्य समूह की बैठक शुरू हो गई है। बैठक में दोनों देशों से जुड़े सीमा प्रबंधन, सीमा विवाद और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। इसमें गृह मंत्रालय, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और सर्वे ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन पर अहम चर्चा
बैठक के पहले सत्र में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े विभिन्न विषयों पर दोनों पक्षों ने विचार-विमर्श शुरू किया। सीमा विवाद और सीमा प्रबंधन के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी चर्चा की जा रही है।
बैठक में सीमा से जुड़े मामलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए पुराने और आधुनिक तकनीकी माध्यमों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत ब्रिटिश काल के मानचित्रों के साथ आधुनिक ड्रोन सर्वे तकनीक की मदद से मौजूदा परिस्थितियों का अध्ययन करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ब्रिटिश-कालीन नक्शों और ड्रोन सर्वे पर जोर
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े मामलों को बेहतर ढंग से समझने के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों और आधुनिक तकनीक के संयोजन पर चर्चा हो रही है। अधिकारियों की ओर से ब्रिटिश-कालीन मानचित्रों तथा ड्रोन सर्वे के जरिए वास्तविक स्थिति का आकलन करने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बेहतर समझ विकसित करना और चर्चा के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।
व्यापार और पारंपरिक आवाजाही पर फोकस
बैठक में सीमा प्रबंधन के साथ स्थानीय व्यापार और पारंपरिक आवाजाही को सुगम बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य सीमा से संबंधित मामलों का समाधान तलाशने के साथ दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों और पारंपरिक आवागमन को आसान बनाए रखना है।
दोनों पक्षों के बीच हो रही यह बैठक भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीमा से जुड़े विषयों पर समन्वय बढ़ाने के साथ व्यापार और आवागमन को सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि दोनों देशों के आपसी संबंध और अधिक प्रगाढ़ हो सकें।



